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High Security Lapse: 17 साल से बंद पुराने अपराधी ने जेल परिसर के भीतर दिया वारदात को अंजाम; सिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

Bilaspur Jail Murder Case (बिलासपुर जेल हत्याकांड): छत्तीसगढ़ की न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर जिले के केंद्रीय जेल (Central Jail Bilaspur) परिसर के भीतर से सुरक्षा और बैरकों की निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा करने वाली एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक वारदात सामने आई है। जेल के भीतर बंद कैदियों के बीच खूनी संघर्ष इस हद तक बढ़ गया कि एक दुराचारी और पुराने शातिर अपराधी ने दूसरे विचाराधीन कैदी की बेरहमी से हत्या कर दी। मिली जानकारी के अनुसार, एक बेहद संगीन तिहरे हत्याकांड (Triple Murder) के मामले में पिछले 17 वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे एक खूंखार कैदी ने बैरक परिसर में ही रखे एक भारी-भरकम पत्थर से पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के एक अन्य विचाराधीन बंदी के सिर पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। पत्थर के इस जानलेवा और घातक प्रहार से पीड़ित बंदी का सिर पूरी तरह से लहूलुहान हो गया और वह वहीं अचेत होकर गिर पड़ा। जेल परिसर में अचानक हुए इस खूनी खेल से वहां तैनात प्रहरियों और अन्य बंदियों के बीच हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई। जेल प्रबंधन द्वारा आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल और मरणासन्न बंदी को तत्काल एम्बुलेंस के जरिए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स अस्पताल) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की सघन चिकित्सा और तमाम प्रयासों के बाद भी गंभीर चोटों के कारण उसकी इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई।

नईदुनिया न्यूज़ नेटवर्क को जेल के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली प्राथमिक और ग्राउंड जीरो की जानकारी के मुताबिक, इस पूरी जघन्य वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी कैदी बेहद आक्रामक और सनकी प्रवृत्ति का है, जो लंबे समय से जेल के भीतर सजा काट रहा है। वहीं, जिस बंदी की इस हमले में मौत हुई है, वह पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में पिछले दो साल से बिलासपुर जेल में विचाराधीन (Under Trial) कैदी के रूप में बंद था। सोमवार और मंगलवार के दरमियानी समय में जब जेल के भीतर कैदियों की सामान्य आवाजाही और दैनिक कार्य चल रहे थे, तभी किसी पुरानी रंजिश, आपसी कहासुनी या अचानक उपजे किसी गंभीर विवाद को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि सजायाफ्ता कैदी ने आव देखा न ताव, परिसर के निर्माण कार्य या बगीचे के पास पड़े एक नुकीले पत्थर को उठाया और पीड़ित कैदी के सिर पर पीछे से जोरदार हमला कर दिया। जब तक वहां मौजूद अन्य कैदी और सुरक्षा प्रहरी बीच-बचाव करने दौड़ते, तब तक आरोपी ने सिर पर तीन से चार बार वार करके पीड़ित को पूरी तरह से अधमरा कर दिया था।
इस बेहद गंभीर और दुस्साहसिक वारदात के बाद बिलासपुर केंद्रीय जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, प्रहरियों की गश्त और जेल नियमावली (Jail Manual) के पालन को लेकर बड़े और तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं। सवाल यह है कि अति-सुरक्षित माने जाने वाले केंद्रीय जेल के भीतर कैदियों की पहुंच इतने खतरनाक पत्थरों या संभावित हथियारों तक कैसे हो गई और जब यह विवाद बढ़ रहा था, तब सुरक्षा वार्डन और प्रहरी कहां तैनात थे? घटना के तुरंत बाद बिलासपुर जिला पुलिस के आला अधिकारी और फोरेंसिक (FSL) की टीम जेल परिसर के भीतर जांच के लिए पहुंच चुकी है। पुलिस ने आरोपी कैदी के खिलाफ हत्या (मर्डर) की नई संगीन धाराओं के तहत एक और आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है।
इस जेल हत्याकांड के बाद जेल महानिदेशक कार्यालय (रायपुर) ने भी मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। बिलासपुर जेल अधीक्षक को इस पूरी सुरक्षा चूक और लापरवाही को लेकर एक विस्तृत जांच रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अब इस बात की कड़ाई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इस खूनी हमले के पीछे कोई गहरी साजिश थी या जेल के भीतर बंद कैदियों के गुटों के बीच कोई अंदरूनी वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। फिलहाल, सिम्स अस्पताल में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मृतक कैदी के शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया की जा रही है, और जेल के भीतर सुरक्षा व बैरकों की निगरानी को पहले से कहीं ज्यादा कड़ा और सख्त कर दिया गया है।







