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छत्तीसगढ़: बिजली विभाग का 'करंट', बड़े बकायादारों से करोड़ों की वसूली के लिए घर-दफ्तर तक पहुंची टीमें

Chhattisgarh RRT News Desk 02 April 2026

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RRT News Raipur: छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति और बढ़ते घाटे को देखते हुए प्रदेशभर में बड़े बिजली बिल बकायादारों के खिलाफ एक व्यापक वसूली अभियान छेड़ा है। विभाग के निशाने पर विशेष रूप से वे औद्योगिक संस्थान, निजी परिसर और सरकारी विभाग हैं, जिनका बिल लंबे समय से लंबित है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में कुल बकाया राशि का आंकड़ा करोड़ों में पहुँच चुका है, जिसके चलते बिजली कंपनी को भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अब विभाग ने 'रिकवरी नहीं तो कनेक्शन नहीं' की नीति अपना ली है।

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सरकारी विभागों और उद्योगों पर करोड़ों का कर्ज

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि कई बड़े सरकारी संस्थान और रसूखदार उद्योगपति भी बिजली बिल जमा करने में कोताही बरत रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसे सैकड़ों उपभोक्ता चिह्नित किए गए हैं, जिनका बकाया 10 लाख रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक है। विभाग ने इन सभी को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार अवसर देने के बावजूद भुगतान न करने वाले संस्थानों की सूची तैयार कर ली गई है और अब बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जा रही है।

कुर्की और कनेक्शन काटने की कड़ी कार्रवाई

अभियान के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा जैसे प्रमुख शहरों में बिजली विभाग की विशेष टीमों ने दबिश देना शुरू कर दिया है। जिन उपभोक्ताओं ने नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं किया, उनके बिजली कनेक्शन तत्काल प्रभाव से काटे जा रहे हैं। कुछ मामलों में, जहाँ बकाया राशि अत्यधिक है, वहां संपत्ति की कुर्की और जब्ती जैसी कानूनी प्रक्रियाएं भी शुरू की जा रही हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कनेक्शन काटने के बाद कोई अवैध रूप से बिजली जोड़ते पाया गया, तो उसके खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी।

आम आदमी पार्टी का विरोध और जनता पर दबाव

एक ओर जहाँ विभाग वसूली में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया है कि बिजली विभाग केवल आम जनता और छोटे उपभोक्ताओं पर सख्ती दिखा रहा है, जबकि बड़े रसूखदारों को छूट दी जा रही है। विपक्षी दलों ने मांग की है कि पहले बड़े बकायादारों से वसूली की जाए, उसके बाद ही आम जनता पर दरों में वृद्धि का बोझ डाला जाए। इधर, CSPDCL के प्रबंध निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे दैनिक आधार पर रिकवरी की रिपोर्ट सौंपें ताकि कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारा जा सके।

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