छत्तीसगढ़। प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाई के समय बच्चों द्वारा जानलेवा स्टंट करने और रील्स बनाने की बढ़ती घटनाओं ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो, जिनमें छात्र स्कूल यूनिफॉर्म में स्टंट करते और अनुशासन की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं, पर आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
प्रबंधन की जवाबदेही होगी तय
बाल आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि स्कूल परिसर के भीतर होने वाली ऐसी किसी भी अनहोनी या अनुशासनहीनता के लिए सीधे तौर पर स्कूल प्रबंधन और संबंधित प्राचार्य जिम्मेदार होंगे। आयोग का मानना है कि स्कूल के समय में बच्चों का इस तरह की गतिविधियों में शामिल होना प्रबंधन की ढिलाई और निगरानी में कमी को दर्शाता है। अब ऐसी घटनाओं के प्रकाश में आने पर स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब किया जाएगा।
निरीक्षण और मोबाइल पर प्रतिबंध के निर्देश
आयोग ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि:
स्कूलों में नियमित अंतराल पर आकस्मिक निरीक्षण किया जाए।
स्कूल परिसर के भीतर छात्रों द्वारा मोबाइल फोन के उपयोग पर कड़ाई से रोक लगाई जाए।
शिक्षकों और प्राचार्यों को निर्देशित किया जाए कि वे बच्चों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें।
अभिभावकों के साथ बैठक कर बच्चों को सोशल मीडिया और स्टंट के खतरों के प्रति जागरूक किया जाए।
बढ़ता जा रहा है 'रील्स' का क्रेज
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में प्रदेश के कई सरकारी और निजी स्कूलों से ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ छात्र क्लासरूम या स्कूल की छतों पर खतरनाक स्टंट करते हुए वीडियो बना रहे हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटना होने पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई की सिफारिश भी की जा सकती है।








