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कॉलेज के पाठ्यक्रम में अब 'बाल सुरक्षा': हर छात्र बनेगा बच्चों के अधिकारों का रक्षक

रायपुर: छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में अब शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिसके तहत बाल सुरक्षा (Child Safety) के विषय को कॉलेज पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे समाज में बच्चों के साथ होने वाले किसी भी शोषण या अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें और एक सुरक्षित वातावरण तैयार करने में मददगार साबित हों।

प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि हर छात्र को बच्चों के अधिकारों का प्रहरी बनना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब देश का युवा वर्ग बाल अधिकारों, पॉक्सो (POCSO) एक्ट और बाल श्रम जैसे कानूनों के प्रति संवेदनशील और शिक्षित होगा, तभी जमीनी स्तर पर बदलाव आएगा। डॉ. शर्मा के अनुसार, कॉलेज स्तर पर इस तरह की पढ़ाई से छात्रों में नैतिक मूल्यों का विकास होगा और वे अपने आस-पास के बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए एक ढाल की तरह काम करेंगे।
इस नए शैक्षणिक बदलाव के तहत कॉलेजों में कार्यशालाओं और विशेष सत्रों का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें छात्रों को सिखाया जाएगा कि संकट में फंसे बच्चों की पहचान कैसे करें और मदद के लिए किन सरकारी तंत्रों व हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग किया जाए। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल बाल अपराधों में कमी आएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी बच्चों के प्रति अधिक संवेदनशील और जागरूक बनेगी। डॉ. वर्णिका शर्मा ने इसे भविष्य के समाज निर्माण के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया है।






