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डीएड अभ्यर्थियों के संघर्ष का 98वां दिन: घुटनों के बल मार्च और 'जल समाधि' का प्रयास; 10 अभ्यर्थी जेल भेजे गए

NV News- रायपुर। छत्तीसगढ़ में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे डीएड (D.Ed) अभ्यर्थियों के संघर्ष का आज 98वां दिन था। पिछले तीन महीनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन युवाओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अभ्यर्थियों ने आज विरोध का एक बेहद कठिन और दर्दनाक रास्ता चुना। राजधानी की सड़कों पर युवा अपने घुटनों के बल रेंगते हुए मार्च निकालने को मजबूर हुए। इस दौरान 'न्याय दो' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा, लेकिन प्रशासन की बेरुखी बरकरार रही।

घुटनों के बल मार्च: छिले पैर और पड़े फफोले
आंदोलन के दौरान दृश्य हृदयविदारक थे। तपती सड़क पर घुटनों के बल चलने के कारण कई महिला और पुरुष अभ्यर्थियों के घुटने छिल गए और पैरों में गहरे फफोले पड़ गए। शारीरिक कष्ट के बावजूद अभ्यर्थियों का जज्बा कम नहीं हुआ। खून से सने घुटनों के साथ वे आगे बढ़ते रहे। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे केवल अपने हक की नौकरी और न्याय मांग रहे हैं, जिसके लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस और मेडिकल टीम ने घायल अभ्यर्थियों का प्राथमिक उपचार किया।
जल समाधि का प्रयास और पुलिसिया कार्रवाई
प्रदर्शन तब और भी तनावपूर्ण हो गया जब हताश होकर कुछ अभ्यर्थियों ने पास के जल स्रोत में 'जल समाधि' लेने का प्रयास किया। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए अभ्यर्थियों को पानी में उतरने से रोका। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे 10 प्रमुख अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस गिरफ्तारी के बाद अन्य प्रदर्शनकारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
डीएड अभ्यर्थियों की मुख्य मांग शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में उनके हितों का संरक्षण और रुकी हुई नियुक्तियों को जल्द पूरा करना है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है। 98 दिनों से खुले आसमान के नीचे बैठे इन युवाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और जेल भेजे गए साथियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक उनका यह सत्याग्रह जारी रहेगा।







