धमतरी। भीषण गर्मी की शुरुआत होते ही धमतरी जिले में 'सफेद सोने' यानी पानी का अवैध कारोबार चरम पर पहुँच गया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक धड़ल्ले से पानी पाउच की बिक्री हो रही है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बाजार में बिक रहे इन पाउच पर न तो मैन्युफैक्चरिंग डेट (निर्माण तिथि) है और न ही एक्सपायरी डेट। नियमों को ताक पर रखकर बेचे जा रहे ये पानी पाउच सीधे तौर पर आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बिना किसी जांच और गुणवत्ता प्रमाणन के बिक रहा यह पानी बीमारियों का सबब बन सकता है।
स्थानीय स्तर पर सक्रिय पानी माफिया चांदी काटने के चक्कर में खाद्य सुरक्षा मानकों की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, पानी पाउच के निर्माण के लिए कड़े नियम हैं, जिसमें बैच नंबर और उपयोग की अंतिम तिथि लिखना अनिवार्य है। बावजूद इसके, धमतरी के होटलों, बस स्टैंड और गली-मोहल्लों की दुकानों में बिना तारीख वाले पाउच खपाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन की सुस्ती का फायदा उठाकर कारोबारी घटिया स्तर के प्लास्टिक और अशुद्ध पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
इस 'काले कारोबार' के उजागर होने के बाद अब स्वास्थ्य और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। गर्मी के मौसम में पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका सबसे अधिक होती है, ऐसे में दूषित पानी जानलेवा साबित हो सकता है। जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से संचालित हो रहे इन पानी प्लांटों पर तत्काल छापेमारी की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, विभाग की चुप्पी ने माफियाओं के हौसले और बुलंद कर दिए हैं।








