छत्तीसगढ़। नौनिहालों के बेहतर भविष्य और उन्हें कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर निकालने के लिए जिला प्रशासन ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। जिले में 'कुपोषण के खिलाफ जंग' अभियान का आगाज होने जा रहा है, जिसके तहत 2,000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत लगभग 85,000 बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर की विस्तृत जांच की जाएगी।
सघन स्क्रीनिंग और ग्रेडिंग
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कुपोषण की श्रेणी में आने वाले बच्चों की पहचान करना है। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीमें बच्चों का वजन, ऊंचाई और 'म्यूक' (MUAC) टेप से बांह की मोटाई मापेंगी। जांच के आधार पर बच्चों को सैम (SAM - गंभीर कुपोषित) और मैम (MAM - मध्यम कुपोषित) श्रेणियों में बांटा जाएगा, ताकि उन्हें उनकी आवश्यकतानुसार उपचार दिया जा सके।
विशेष डाइट और मॉनिटरिंग
प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि जो बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में पाए जाएंगे, उन्हें तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती किया जाएगा। इसके अलावा:
बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक आहार के आधार पर विशेष डाइट चार्ट तैयार किया जाएगा।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य की साप्ताहिक मॉनिटरिंग की जाएगी।
कुपोषित बच्चों की माताओं को पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष परामर्श सत्र आयोजित होंगे।
कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश
जिला कलेक्टर ने अधिकारियों की बैठक लेकर इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आंकड़ों में पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि कोई भी बच्चा इस सुरक्षा कवच से बाहर न छूटे। इस अभियान में जन-भागीदारी को भी जोड़ा जा रहा है, ताकि समुदाय के सहयोग से कुपोषण की दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।
प्रशासन की इस पहल से न केवल बच्चों की सेहत में सुधार होगा, बल्कि शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करने में भी यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा।








