छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक दुर्लभ मामला सामने आया है, जहाँ जिला जेल में बंद एक महिला आरक्षक ने प्रसव के बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। यह महिला आरक्षक सरकारी धन के गबन के गंभीर आरोपों में न्यायिक हिरासत में थी। मामले की संवेदनशीलता तब और बढ़ गई जब यह खुलासा हुआ कि पुलिस ने जब महिला को गिरफ्तार किया था, तब वह नौ महीने की गर्भवती थी। जेल में अचानक प्रसव पीड़ा होने के बाद जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ सुरक्षित डिलीवरी हुई।
आरोपी महिला आरक्षक पर विभागीय फंड और अन्य सरकारी राशियों में हेरफेर करने का आरोप है। जांच के बाद पुलिस ने ठोस सबूतों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। चूंकि मामला वित्तीय अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़ा था, इसलिए गर्भावस्था के बावजूद उसे जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। जेल के भीतर भी चिकित्सा दल लगातार महिला के स्वास्थ्य पर नजर रख रहा था ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। सुरक्षा की दृष्टि से अस्पताल के वार्ड के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा लगाया गया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि जेल मैनुअल के अनुसार, जेल में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए विशेष प्रावधान होते हैं। अब महिला के वकील इस आधार पर अंतरिम जमानत (Interim Bail) की अर्जी लगाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि बच्चे का पालन-पोषण और महिला का रिकवरी पीरियड घर पर बीत सके।
इस घटना ने पुलिस विभाग के भीतर भी कई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। एक ओर जहां भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत गिरफ्तारी अनिवार्य थी, वहीं दूसरी ओर एक गर्भवती महिला की जेल कस्टडी को लेकर मानवीय आधार पर सवाल भी उठ रहे हैं। फिलहाल, जिला प्रशासन और जेल विभाग न्यायालय के अगले निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। छुट्टी मिलने के बाद महिला को वापस जेल ले जाया जाएगा या घर, यह कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा।








