RRT News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो भोले-भले लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उन खातों को साइबर ठगों को 'म्यूल अकाउंट' के रूप में बेच देते थे। इन खातों का उपयोग देश भर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को खपाने और उसे लेयरिंग (Layering) के जरिए गायब करने में किया जा रहा था।
पकड़े गए आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस की साइबर सेल और स्थानीय थानों की संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर इन आरोपियों को अलग-अलग ठिकानों से दबोचा। जांच में यह भी सामने आया है कि ये आरोपी टेलीग्राम (Telegram) और अन्य सोशल मीडिया एप्स के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय ठगों के संपर्क में थे और प्रत्येक सक्रिय खाते के बदले मोटा कमीशन वसूलते थे।
दुर्ग एसपी के अनुसार, यह गिरोह मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाता था जिन्हें बैंकिंग प्रणाली की ज्यादा जानकारी नहीं होती थी। उनके दस्तावेजों का उपयोग कर खाते खुलवाए जाते थे और फिर उन खातों का पूरा कंट्रोल (इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और सिम) ठगों के हाथ में सौंप दिया जाता था। पुलिस अब इन खातों में हुए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जांच कर रही है और इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े नामों की तलाश जारी है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे मामूली लालच में आकर अपना बैंक खाता या आधार कार्ड किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
क्या होता है म्यूल अकाउंट (Mule Account)?
यह एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से प्राप्त धन को प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। खाताधारक को अक्सर इस बात की जानकारी नहीं होती कि उसके खाते का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग या साइबर ठगी के लिए किया जा रहा है।








