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युवा का कमाल: प्लास्टिक मुक्त भारत की दिशा में 'प्लांट कप' की नई क्रांति, चाय पीकर फेंकने पर मिट्टी को मिलेगा पोषण

RRT News- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के एक युवा उद्यमी अंकुश ने पर्यावरण को प्लास्टिक के जहर से बचाने के लिए एक क्रांतिकारी विकल्प तैयार किया है। उन्होंने ऐसे 'इको-फ्रेंडली' कप का निर्माण किया है, जो न केवल प्लास्टिक और डिस्पोजेबल कपों का विकल्प है, बल्कि पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाला (Biodegradable) है। यह पहल प्रधानमंत्री के 'सिंगल यूज प्लास्टिक' मुक्त भारत के सपने को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

मिट्टी को प्रदूषित नहीं, बल्कि उपजाऊ बनाता है यह कप
आमतौर पर प्लास्टिक या पेपर कप मिट्टी में मिलकर उसे प्रदूषित करते हैं और सैकड़ों सालों तक नष्ट नहीं होते। इसके विपरीत, अंकुश द्वारा तैयार किया गया यह कप प्राकृतिक तत्वों से बना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि उपयोग के बाद जब इसे मिट्टी में फेंका जाता है, तो यह कुछ ही दिनों में पूरी तरह से गल जाता है। गलने के बाद यह मिट्टी के लिए जैविक खाद (Organic Fertilizer) का काम करता है, जिससे पौधों को पोषण मिलता है और भूमि की उर्वरता बढ़ती है।
युवा उद्यमी अंकुश का विजन और तकनीक
अंकुश ने इस कप को तैयार करने के लिए स्थानीय संसाधनों और कृषि अवशेषों का बुद्धिमानी से उपयोग किया है। उनका उद्देश्य एक ऐसा उत्पाद बनाना था जो सस्ता भी हो और पर्यावरण को शून्य नुकसान पहुँचाए। इस कप में गरम चाय या कॉफी पीने के दौरान किसी भी प्रकार का हानिकारक केमिकल शरीर में नहीं जाता, जो सेहत के लिहाज से भी सुरक्षित है। उनके इस स्टार्टअप ने न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार दिया है, बल्कि छत्तीसगढ़ की नवाचार क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
समाज और प्रकृति के लिए दोहरा लाभ
यह 'प्लांट कप' भविष्य की जरूरतों के लिए एक बेहतरीन समाधान है। एक तरफ यह कचरे की समस्या को जड़ से खत्म करता है, वहीं दूसरी तरफ यह 'वेस्ट टू वेल्थ' (कचरे से कंचन) के सिद्धांत पर काम करता है। दुर्ग के इस युवा की पहल की चारों ओर सराहना हो रही है। यदि इस प्रकार के उत्पादों का व्यापक स्तर पर उपयोग शुरू हो जाए, तो शहरों के डंपिंग यार्ड में प्लास्टिक के पहाड़ों को कम करने और हरियाली बढ़ाने में यह मील का पत्थर साबित होगा।







