Breaking
- प्रतिभा बड़े शहरों की मोहताज नहीं, सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सरगुजा का बच...
- Good Governance News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में संवेदनशील शासन...
- बस के अंदर फांसी पर लटकी मिली कंडक्टर की लाश, मचा हड़कंप
- जय अंबे स्वीट्स, जनता स्वीट्स और स्वीट हार्ट सील, छापे में मिठाइयों में कीड़े...
- छत्तीसगढ़ में लापरवाह अधिकारियों को लेकर शासन गंभीर, PWD के 13 अधिकारियों को ...
- रायपुर में 53 लाख की चोरी का खुलासा, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार; गीजर और खि...
- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने तीन गांवों में 1.55 करोड़ रुपए के गौरव पथ निर्मा...
- गोवंश हत्या के आरोपियों का शहर में निकाला जुलूस, एक दिन पहले थाने का हुआ था घ...
- ग्रामीण विकास में पंच-सरपंचों की सक्रिय भागीदारी जरूरी: वन मंत्री केदार कश्यप
- Accident News: कोरबा में तेज रफ्तार बुलेट का कहर:जसगीत गाने जा रही दो महिलाओं...
History Update: एर्राबोर कांड की खौफनाक सच्चाई, 2 घंटे तक चला हमला, 35 ग्रामीणों की हत्या

History Update के तहत एर्राबोर में हुआ माओवादी हमला आज भी देश के सबसे खौफनाक नक्सली हमलों में गिना जाता है। यह हमला साल 2006 में उस समय हुआ जब क्षेत्र में तनाव चरम पर था और हजारों ग्रामीण राहत शिविरों में रह रहे थे।

जानकारी के मुताबिक, माओवादियों ने राहत शिविर पर करीब 2 घंटे तक हमला किया। इस दौरान उन्होंने अंधाधुंध हिंसा करते हुए करीब 30 से अधिक ग्रामीणों (लगभग 35) की हत्या कर दी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
हमले के दौरान माओवादियों ने शिविर और आसपास के गांवों में जमकर आगजनी की। रिपोर्ट्स के अनुसार 200 से अधिक (करीब 220) घरों को जला दिया गया, जिससे सैकड़ों लोग बेघर हो गए और पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
यह घटना उस दौर में हुई जब सलवा जुडूम आंदोलन के चलते ग्रामीणों को अपने गांव छोड़कर कैंपों में रहना पड़ रहा था। माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष का सबसे बड़ा खामियाजा आम ग्रामीणों को उठाना पड़ा।
एर्राबोर कांड आज भी नक्सल हिंसा के इतिहास का एक काला अध्याय माना जाता है, जिसने सुरक्षा, विस्थापन और आदिवासी इलाकों में शांति बहाली को लेकर कई बड़े सवाल खड़े किए।





_m.webp)
_m.webp)
