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Farmer Success: मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी से युवा किसान ने बदली खेती की तस्वीर

Chhattisgarh 06 September 2026

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जशपुर, 6 सितंबर 2026। खेती में बदलाव सिर्फ नई तकनीक अपनाने से नहीं, बल्कि सोच में बदलाव से भी आता है। जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने पारंपरिक खेती को बहुआयामी कृषि मॉडल में बदलकर इसका उदाहरण पेश किया है। कभी बारिश के भरोसे धान की खेती करने वाले अंकित अब मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती को एक साथ जोड़कर खेत से आय के कई स्रोत विकसित कर रहे हैं।

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अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करीब 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता मिली है। योजना के माध्यम से मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। 

धान की खेती से शुरू हुआ सफर, अब खेत में कई गतिविधियां

अंकित बताते हैं कि पहले उनकी खेती मुख्य रूप से बारिश के मौसम में होने वाली धान की फसल तक सीमित थी। आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने कृषि और मत्स्य विभाग से जानकारी ली और अपने खेत में दो तालाब तैयार कराकर मछली पालन शुरू किया।

तालाब बनने के बाद खेत का उपयोग पूरे साल करने की संभावनाएं बढ़ीं। तालाब के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए होने लगा, जिससे गर्मी के मौसम में भी खेती करना संभव हुआ। इसके साथ ही खेत में आम, लीची सहित अन्य फलदार पौधे लगाए गए हैं।

मछली और मुर्गी पालन को जोड़ा

अंकित ने दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किया है। इसमें करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों के पालन की क्षमता है। उन्होंने मछली पालन और मुर्गी पालन को एक-दूसरे से जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने का प्रयास किया है।

मुर्गियों से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग तालाब की पारिस्थितिकी में किया जाता है, जिससे मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। इस तरह एक ही स्थान पर संचालित दोनों गतिविधियों से संसाधनों का दोहरा उपयोग हो रहा है।

तालाब की मेड़ पर बागवानी, भविष्य में अतिरिक्त आय

अंकित ने तालाबों की मेड़ों पर आम और अन्य फलदार पौधे लगाए हैं। इन पौधों की सिंचाई तालाब के पानी से की जाती है। मेड़ पर पौधे लगाने से भूमि के बेहतर उपयोग के साथ भविष्य में फल उत्पादन से अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है।

इस मॉडल में तालाब सिर्फ मछली पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि सिंचाई और बागवानी जैसी अन्य गतिविधियों के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है।

8 लाख रुपये की सहायता से मिला विस्तार

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अंकित को करीब 8 लाख रुपये की शासकीय सहायता मिली। इसके साथ पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

अंकित के मुताबिक, विभागीय अधिकारियों से मिले मार्गदर्शन ने उन्हें मछली पालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद की। योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है। 

बहुफसली खेती से सालभर उत्पादन का प्रयास

अब अंकित अपने खेत को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखते। मछली और मुर्गी पालन के साथ अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों की खेती तथा बागवानी भी कर रहे हैं। तालाब के पानी की उपलब्धता से गर्मी के मौसम में भी खेती जारी रखने का अवसर मिल रहा है।

कृषि, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन को एक साथ जोड़ने से खेत के अलग-अलग संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे किसान के लिए आय के विविध स्रोत तैयार करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

युवाओं के लिए खेती को व्यवसाय बनाने की मिसाल

अंकित लकड़ा का यह मॉडल ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनकी पहल बताती है कि सीमित संसाधनों का बेहतर नियोजन, सरकारी योजनाओं की जानकारी और मेहनत के जरिए पारंपरिक खेती को आधुनिक कृषि उद्यम का रूप दिया जा सकता है।

अंकित का खेत अब केवल फसल उत्पादन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती को जोड़ने वाला एकीकृत कृषि मॉडल बन गया है।

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