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Fibromyalgia DNA Research: क्या फाइब्रोमायल्जिया का दर्द DNA से जुड़ा है? नई इंटरनेशनल रिसर्च में बड़ा दावा

HEALTH 29 July 2026

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नई दिल्ली। लंबे समय से रहस्य बनी हुई बीमारी फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia) को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने वैज्ञानिकों को अहम सुराग दिए हैं। हाल ही में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में दावा किया गया है कि इस बीमारी का संबंध केवल मानसिक या शारीरिक कारणों से नहीं, बल्कि व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना (DNA) से भी हो सकता है। 

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करीब 25 लाख से अधिक लोगों के आनुवंशिक डेटा का विश्लेषण करने वाले इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने फाइब्रोमायल्जिया से जुड़े 26 आनुवंशिक (Genetic) जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की है। शोध के अनुसार, ये जीन मुख्य रूप से मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़े हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि बीमारी में तंत्रिका तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। 

क्या है फाइब्रोमायल्जिया?

फाइब्रोमायल्जिया एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) बीमारी है, जिसमें पूरे शरीर में लगातार दर्द, अत्यधिक थकान, नींद की समस्या, याददाश्त में कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इसका सटीक कारण अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन नई रिसर्च इसे बेहतर समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 

अभी इलाज में बदलाव नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन बीमारी के जैविक कारणों को समझने में मदद करेगा, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि केवल DNA ही फाइब्रोमायल्जिया का कारण है। पर्यावरण, तनाव और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल इस रिसर्च के आधार पर इलाज या जांच की प्रक्रिया में कोई तत्काल बदलाव नहीं किया गया है। 

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