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हाईकोर्ट ने जिस पुलिसिया कार्रवाई को बताया 'अवैध', उसका VIDEO आया सामने: मां के सामने होटल मालिक को पीटा, बिना FIR ले गए थाना...

Chhattisgarh RRT News Desk 28 January 2026

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छत्तीसगढ़ से पुलिसिया रसूख और बर्बरता का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने खाकी को शर्मसार कर दिया है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी एक होटल मालिक को उसकी बुजुर्ग मां के सामने बेरहमी से पीट रहे हैं। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने बिना किसी एफआईआर (FIR) या कानूनी प्रक्रिया के युवक को जबरन हिरासत में लिया, जिसे हाईकोर्ट ने अब 'पूरी तरह अवैध' करार दिया है।

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मां के सामने घसीटकर ले गई पुलिस

घटना के दौरान होटल मालिक की मां अपने बेटे को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़ती रही और गिड़गिड़ाती रही, लेकिन पुलिस का दिल नहीं पसीजा। वीडियो में पुलिसकर्मी युवक को थप्पड़ मारते और घसीटते हुए गाड़ी में बैठाते दिख रहे हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने होटल में तोड़फोड़ की और थाने ले जाने के बाद भी लॉकअप में युवक के साथ मारपीट की गई।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: कानून का उल्लंघन

मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा, तो माननीय न्यायाधीश ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना किसी प्राथमिक सूचना या कानूनी आधार के उठाना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है। हाईकोर्ट ने इस पूरी कार्रवाई को 'अवैध' बताते हुए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।

बिना FIR थाने में मारपीट का आरोप

पीड़ित होटल मालिक ने अपनी याचिका में बताया कि उसे घंटों थाने में अवैध तरीके से रखा गया। पुलिस के पास न तो कोई वारंट था और न ही उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज था। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 'डीके बसु' दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है, जो गिरफ्तारी के समय पुलिस के व्यवहार और प्रक्रिया को निर्धारित करते हैं।

पुलिस विभाग की साख पर लगा दाग

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुलिस विभाग के आला अधिकारियों में खलबली मच गई है। आम जनता में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाएगी। अब देखना यह होगा कि कोर्ट की फटकार के बाद दोषी पुलिसकर्मियों पर क्या विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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