छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय में दबिश दी। गुरुवार शाम को हुई इस कार्रवाई में सहायक ग्रेड-2 के लिपिक गिरीश कुमार वारे को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। एसीबी की इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप मच।
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला विभाग के ही एक कर्मचारी के स्थानांतरण (ट्रांसफर) से जुड़ा हुआ है। कांसाबेल निवासी योगेश शांडिल्य, जो विभाग में भृत्य के पद पर कार्यरत हैं, उनका तबादला जुलाई 2025 में लोदाम किया गया था। आरोपी लिपिक गिरीश वारे ने दावा किया कि यह ट्रांसफर उसी की सिफारिश पर हुआ है और इसके बदले में उसने 80 हजार रुपये की मांग की थी।
पीड़ित भृत्य योगेश के अनुसार, आरोपी लिपिक पिछले काफी समय से पैसों के लिए दबाव बना रहा था। योगेश ने मजबूरी में पहले ही 30 हजार रुपये दे दिए थे, लेकिन आरोपी बाकी की रकम के लिए लगातार फोन कर रहा था। हद तो तब हो गई जब दिसंबर 2025 में लिपिक ने योगेश की बाइक की चाबी जब्त कर ली और शर्त रखी कि बकाया 40 हजार रुपये देने के बाद ही उसे अपनी बाइक वापस मिलेगी।
आरोपी की प्रताड़ना से तंग आकर योगेश ने एंटी करप्शन ब्यूरो में इसकी शिकायत दर्ज कराई। योजना के तहत गुरुवार को एसीबी की टीम ने नोटों पर केमिकल लगाकर योगेश को आरोपी के पास भेजा। जैसे ही जिला कार्यालय में योगेश ने लिपिक को 40 हजार रुपये नकद सौंपे, पहले से तैयार एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। हाथ धुलाने पर लिपिक के हाथ गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
देर शाम तक जशपुर जिला कार्यालय में एसीबी की जांच और पंचनामा की प्रक्रिया चलती रही। आरोपी लिपिक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इस घटना ने सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है और यह साफ कर दिया है कि कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर किस तरह अवैध वसूली का खेल चल रहा था।








