नई दिल्ली/रायपुर: देश में बढ़ते ड्रग्स के जाल को काटने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों ने अब तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने का फैसला किया है। केंद्र और राज्य सरकारों के साझा अभियान के तहत एक बड़े ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों को 'फ्रीज' (Freeze) करने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया गया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और पुलिस की वित्तीय जांच शाखा ने पाया कि तस्करों ने नशे के अवैध कारोबार से करोड़ों रुपये की काली कमाई की और उसे लग्जरी कारों, बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों में निवेश किया।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि यह सिंडिकेट न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय था। अधिकारियों ने बताया कि स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (SAFEMA) और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की सख्त धाराओं के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस आदेश के बाद अब तस्कर इन संपत्तियों का न तो हस्तांतरण कर पाएंगे और न ही इन्हें बेच सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य ड्रग माफियाओं के वित्तीय रसद (Financial Supply) को पूरी तरह से ध्वस्त करना है।
छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इस कार्रवाई का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। हाल ही में रायपुर पुलिस ने 'ऑपरेशन निश्चय' के तहत कई बड़े तस्करों को गिरफ्तार किया था, जिनकी संपत्तियों का ब्यौरा अब संबंधित अथॉरिटी को भेजा गया है। जब्त की गई संपत्तियों में आलीशान बंगले, महंगी जमीनें और कई किलो सोने के आभूषण शामिल हैं। प्रशासन का मानना है कि केवल जेल भेजना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि उनकी अवैध कमाई को सरकारी खजाने में कुर्क (Attachment) न कर लिया जाए।
पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नशे के सौदागर अपनी कमाई को छिपाने के लिए 'हवाला' और 'शेल कंपनियों' का सहारा लेते थे। तकनीकी सर्विलांस और बैंक स्टेटमेंट की गहन स्क्रूटनी के बाद इन संपत्तियों का सीधा संबंध नशीले पदार्थों की बिक्री से पाया गया है। आगामी दिनों में कई और बड़े नामों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलने या उन्हें सील करने की तैयारी है। इस सख्त रुख से अवैध ड्रग बाजार में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों और अवैध संपत्ति अर्जन की जानकारी साझा करें। 'नशा मुक्त भारत' अभियान के तहत यह अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि ड्रग तस्करी को एक 'घाटे का सौदा' बना दिया जाए, जिससे अपराधी इस धंधे में उतरने से पहले सौ बार सोचें।








