Jaggi Murder Case : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे चर्चित 'रामावतार जग्गी हत्याकांड' में आज हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। आरोपी रहे अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यहाँ समझिये इस पूरे मामले का घटनाक्रम और आज का आदेश:
1. हाईकोर्ट का ताजा फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस डिवीजन बेंच ने अमित जोगी को तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्हें 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।
2. कब हुई थी हत्या?
तारीख थी 4 जून 2003। रायपुर में एनसीपी (NCP) के दिग्गज नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी और अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे।
3. कौन थे रामावतार जग्गी?
जग्गी एक बड़े कारोबारी और राजनीतिज्ञ थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते थे। शुक्ल के साथ ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ एनसीपी का दामन थामा था।
4. निचली अदालत का 2007 का फैसला
31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने इस मामले में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, पर्याप्त सबूत न होने की बात कहकर अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।
5. क्यों फंसा पेच?
जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सालों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला वापस हाईकोर्ट पहुंचा, जहां आज यह कड़ा फैसला आया।
6. दोषियों की लंबी फेहरिस्त
इस हत्याकांड में याहया ढेबर, अभय गोयल, वीके पांडे और फिरोज सिद्दीकी समेत कई रसूखदार नाम शामिल थे, जिन्हें पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है।
7. सरकारी गवाहों की भूमिका
जांच के दौरान बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जिन्होंने इस पूरी साजिश की परतें खोलने में अहम भूमिका निभाई थी।
8. राजनीतिक हलचल
अमित जोगी वर्तमान में 'जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)' के प्रमुख हैं। इस आदेश के बाद उनकी पार्टी और प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है।
9. अब अमित जोगी के पास क्या रास्ता है?
कानूनन उन्हें 21 दिनों के भीतर सरेंडर करना होगा। वे इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
10. पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
सतीश जग्गी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि "न्याय मिलने में देरी जरूर हुई है, लेकिन सच की जीत हुई है।"
इस मामले में ये पाए गए थे दोषी
जग्गी हत्याकांड में अब तक कई रसूखदार और पुलिस विभाग से जुड़े लोग दोषी पाए जा चुके हैं, जिनमें अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, और अन्य शामिल हैं।








