कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सरकारी धान भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदा गया लगभग 26 हजार क्विंटल धान गोदामों से गायब पाया गया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस धान की कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
मामला जिले के दो प्रमुख सरकारी संग्रहण केंद्रों से जुड़ा है, जहां स्टॉक का मिलान करने पर रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर सामने आया। जब अधिकारियों से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने धान के नष्ट होने की वजह चूहों, दीमक और कीटों द्वारा नुकसान बताया। इस तर्क के बाद प्रशासनिक हलकों से लेकर आम जनता तक में चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों और किसान संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान का चूहों और कीड़ों द्वारा नष्ट होना संभव नहीं लगता। उनका आरोप है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि गंभीर अनियमितताओं और संभावित घोटाले की ओर इशारा करता है। किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सूत्रों के अनुसार आंतरिक जांच में गोदामों के रिकॉर्ड, आवक-जावक रजिस्टर और निगरानी व्यवस्था में भी गड़बड़ियां पाई गई हैं। कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है और प्रशासन स्तर पर जवाबदेही तय करने की तैयारी की जा रही है।
इस घटना के बाद राज्य की धान खरीदी और भंडारण प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और सच्चाई सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।








