रायगढ़ जिले के खरसिया में स्थित औद्योगिक इकाई में हुए दर्दनाक हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया है। पिछले दिनों हुए इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसी 9 माह की मासूम बच्ची की मौत के बाद, अब उसके पिता और एक अन्य घायल युवक ने भी दम तोड़ दिया है। अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे इन पीड़ितों की मृत्यु के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिजनों पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब इलाज के दौरान पिता ने अपनी मासूम बेटी के गम में दम तोड़ दिया। इस हादसे में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है, जो सभी एक ही परिवार या करीबी बताए जा रहे हैं। घटना के बाद से ही ग्रामीणों और परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि प्रबंधन की घोर लापरवाही और सुरक्षा उपकरणों के अभाव के कारण यह भयावह स्थिति निर्मित हुई है। पीड़ितों के घर में अब केवल चीखें और मातम पसरा हुआ है।
स्थानीय निवासियों और विभिन्न संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और दोषी प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उद्योगों में सुरक्षा ऑडिट के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है, जिसका खामियाजा गरीब मजदूरों और उनके परिवारों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
हादसे की भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की जा रही है। खरसिया का यह औद्योगिक क्षेत्र पहले भी सुरक्षा संबंधी विवादों में रहा है, लेकिन तीन मौतों के इस नए मामले ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या दोषियों पर कोई कठोर मिसाल कायम की जाती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।








