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धान तस्करी पर प्रशासन का बड़ा प्रहार: 1.5 करोड़ रुपये का अवैध धान जब्त, चार बिचौलियों पर FIR दर्ज

Chhattisgarh RRT News Desk 16 January 2026

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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सीजन के दौरान अवैध व्यापार और तस्करी को रोकने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न सीमावर्ती इलाकों और गोदामों में छापेमारी की। इस सघन जांच अभियान के दौरान अधिकारियों ने भारी मात्रा में अवैध धान बरामद किया है, जिसे बाहरी राज्यों से लाकर खपाने की योजना बनाई गई थी।

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प्रशासन द्वारा जब्त किए गए इस अवैध धान की कुल बाजार कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। जांच में पाया गया कि तस्करों ने अवैध रूप से धान को बोरियों में भरकर गोदामों में छिपा रखा था ताकि इसे सरकारी केंद्रों पर ऊंचे दामों में बेचा जा सके। अधिकारियों ने मौके पर ही धान को कुर्क कर लिया और संबंधित वाहनों एवं भंडारण स्थलों को सील कर दिया है, जिससे धान माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

इस पूरे अवैध कारोबार के मुख्य सूत्रधारों की पहचान करते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच के बाद चार प्रमुख बिचौलियों (बिचौलियों) के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इन व्यक्तियों पर धोखाधड़ी और आवश्यक वस्तु अधिनियम के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह गिरोह लंबे समय से फर्जी किसान बनकर या किसानों के नाम पर धान की अवैध बिक्री में लिप्त था।

कलेक्टर और जिले के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि धान की खरीदी केवल वास्तविक किसानों से ही की जाएगी और बिचौलियों के लिए व्यवस्था में कोई जगह नहीं है। सीमावर्ती जिलों में विशेष चेक पोस्ट बनाए गए हैं और 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है ताकि दूसरे राज्यों से धान का प्रवेश पूरी तरह बंद किया जा सके। सरकार की इस मुस्तैदी का उद्देश्य वास्तविक किसानों को उनके पसीने की पूरी कीमत दिलाना और सरकारी खजाने को नुकसान से बचाना है।

आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है, क्योंकि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। प्रशासन ने आम जनता और किसानों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कहीं भी अवैध धान का भंडारण या परिवहन दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दें। यह कार्रवाई एक संदेश है कि अवैध व्यापार करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

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