भिलाई: इस्पात नगरी भिलाई में भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के निजीकरण के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव पिछले तीन दिनों से बिना कुछ खाए आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके इस आंदोलन को स्थानीय मजदूरों, यूनियन नेताओं और आम नागरिकों का भारी समर्थन मिल रहा है। विधायक का स्पष्ट कहना है कि जब तक केंद्र सरकार और संयंत्र प्रबंधन निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लेते और DIC (Director In-Charge) से ठोस बातचीत नहीं होती, तब तक उनका यह अनशन जारी रहेगा।
प्रबंधन के साथ वार्ता रही बेनतीजा:
आंदोलन के तीसरे दिन BSP प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों ने विधायक से मुलाकात कर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। हालांकि, प्रबंधन की ओर से निजीकरण और विनिवेश (Disinvestment) के मुद्दों पर कोई लिखित आश्वासन या स्पष्टीकरण नहीं मिलने के कारण बातचीत विफल रही। विधायक देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि प्रबंधन केवल टालमटोल की नीति अपना रहा है और संयंत्र की बेशकीमती संपत्तियों को निजी हाथों में बेचने की तैयारी पर्दे के पीछे चल रही है।
विधायक की मुख्य मांगें:
निजीकरण पर रोक: BSP के किसी भी विभाग या यूनिट का निजीकरण न किया जाए।
स्थानीय रोजगार: संयंत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार की प्राथमिकता दी जाए।
ठेका मजदूरों का हित: ठेका मजदूरों के वेतन और सुरक्षा मानकों में सुधार हो।
DIC से सीधी मुलाकात: विधायक ने मांग की है कि प्रबंधन के निचले स्तर के अधिकारियों के बजाय डायरेक्टर इंचार्ज स्वयं आकर स्थिति स्पष्ट करें।
स्वास्थ्य बिगड़ने की चिंता:
तीन दिनों से अन्न त्यागने के कारण विधायक देवेंद्र यादव के स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई है। डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनके ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की निगरानी कर रही है। समर्थकों का कहना है कि विधायक की जिद है कि वे भिलाई के हक की लड़ाई के लिए अपनी जान की बाजी लगाने को तैयार हैं। अनशन स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और माहौल तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण बना हुआ है।
राजनीतिक और सामाजिक समर्थन:
इस आंदोलन ने अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले लिया है। विभिन्न ट्रेड यूनियनों और सामाजिक संगठनों ने विधायक के समर्थन में मशाल जुलूस निकालने और 'भिलाई बंद' जैसे कदमों की चेतावनी दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए देवेंद्र यादव के संघर्ष को जायज ठहराया है। भिलाई की जनता का मानना है कि यदि संयंत्र का निजीकरण होता है, तो इससे शहर की पूरी अर्थव्यवस्था और हजारों परिवारों का भविष्य दांव पर लग जाएगा।








