छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के एक सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। जिले के मोहला ब्लॉक के एक प्राथमिक शाला में लंबे समय से शिक्षिका के स्कूल न आने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षिका ने सत्र शुरू होने के बाद से एक भी क्लास नहीं ली है। इससे नाराज होकर बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल पहुंचे और मुख्य द्वार पर ताला जड़कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पदस्थ शिक्षिका मेडिकल लीव (चिकित्सा अवकाश) के नाम पर महीनों से गायब हैं, लेकिन उनकी जगह वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र के बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता देख अभिभावकों का सब्र टूट गया। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन साधे हुए हैं। स्कूल बंद होने की खबर मिलते ही आसपास के गांवों में भी आक्रोश फैल गया है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षिका की अनुपस्थिति के कारण बच्चे स्कूल तो आते हैं, लेकिन दिनभर बिना पढ़ाई के वापस लौट जाते हैं। "मैडम ने एक भी क्लास नहीं ली" जैसे नारों के साथ ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में भले ही मैडम छुट्टी पर हों, लेकिन बच्चों के कीमती समय की भरपाई कौन करेगा? ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक नए शिक्षक की नियुक्ति नहीं होती, वे स्कूल का ताला नहीं खोलेंगे।
घटना की सूचना मिलने के बाद शिक्षा विभाग के स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि शिक्षक की कमी के कारण समस्या हो रही है, लेकिन नियमानुसार कार्रवाई की बात कही। हालांकि, ग्रामीण ठोस आश्वासन और तत्काल वैकल्पिक शिक्षक की मांग पर अड़े रहे। इस घटना ने एक बार फिर दूरस्थ वनांचलों में शिक्षा के गिरते स्तर और विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
फिलहाल, ग्रामीणों के कड़े रुख को देखते हुए विभाग ने पास के दूसरे स्कूल से एक शिक्षक को अस्थायी रूप से संबद्ध करने का निर्णय लिया है। लेकिन ग्रामीण इस "जुगाड़ की शिक्षा व्यवस्था" से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि आदिवासी बच्चों के साथ यह भेदभाव बंद होना चाहिए और उन्हें नियमित शिक्षक मिलना चाहिए। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शिक्षिका इतने लंबे समय तक बिना ठोस कारण के ड्यूटी से बाहर क्यों रहीं।








