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दिव्यांग कलाकार Basant Sahu को राष्ट्रीय सम्मान: कला और प्रेरणा का संगम
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धमतरी | RRT News | 05 दिसम्बर 2025

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कलाकार Basant Sahu को उनके असाधारण योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। Basant Sahu, जो कि दुर्घटना के बाद दिव्यांग हो गए थे, ने अपने जीवन को कला के माध्यम से अर्थपूर्ण बनाया और समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया।
उनकी पेंटिंग्स में पारंपरिक लोक कला के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश भी दिखाई देते हैं। उनकी कलाकृतियाँ न केवल राज्य संग्रहालय और राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित हुई हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी प्रशंसा हुई है।
Basant Sahu ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद गर्व का क्षण है। उन्होंने सभी युवा कलाकारों को संदेश दिया कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, कला के माध्यम से अपने सपनों और सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स में इस सम्मान को छत्तीसगढ़ के कला जगत के लिए प्रेरणादायक बताया गया है। उनके योगदान से न केवल लोक कला को नई दिशा मिली है, बल्कि दिव्यांग कलाकारों के लिए भी एक मिसाल कायम हुई है।
यह पुरस्कार कला, संघर्ष और प्रेरणा का प्रतीक बनकर राज्य और देश में युवाओं को नई उम्मीद दे रहा है।
धमतरी जिले के कुरुद के सुप्रसिद्ध चित्रकार बसंत साहू को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर देश के सर्वोच्च दिव्यांगजन सम्मान से नवाज़ा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार 2025 की ‘सर्वश्रेष्ठ दिव्यांगजन कलाकार’ श्रेणी में सम्मानित किया।
95% दिव्यांग होने के बावजूद कला से बनाया विशेष मुकाम
52 वर्षीय बसंत साहू 95% दिव्यांगता के साथ जीवन गुज़ार रहे हैं, लेकिन व्हीलचेयर पर बैठकर बनाई गई उनकी उत्कृष्ट पेंटिंग्स उन्हें कला जगत में एक पहचान दिलाती हैं। पिछले तीन दशकों से वे लगातार कला साधना में जुटे हैं। एक–एक पेंटिंग को पूरा करने में चार से पाँच दिन तक का समय लगता है।
“दिव्यांगता कमजोरी नहीं, सिर्फ परिस्थिति है” — राष्ट्रपति मुर्मू
समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू ने बसंत सहित अन्य सम्मानित कलाकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब दिव्यांगजनों को समान अवसर और सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि ऐसे कलाकारों को दया नहीं, बल्कि गरिमा और सशक्तिकरण की आवश्यकता होती है।
“आत्मा की उड़ान असीम है” — बसंत साहू
सम्मान मिलने के बाद बसंत साहू ने कहा कि यह पुरस्कार उनके परिवार, उनकी माँ और सभी शुभचिंतकों की प्रेरणा का परिणाम है। उन्होंने कहा—
“शरीर सीमित हो सकता है, लेकिन आत्मा की उड़ान हमेशा असीम रहती है।” उनकी हर पेंटिंग इसी भाव को जीवन देती है।
प्रदेशभर में जश्न का माहौल
बसंत साहू को मिले इस राष्ट्रीय सम्मान के बाद धमतरी और कुरुद क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों और कुरुद निवासियों ने उन्हें बधाइयाँ दीं और इसे प्रदेश का गौरव बताया।







