छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) रायपुर के डायरेक्टर और रजिस्ट्रार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह मामला कोर्ट के पिछले आदेशों की अवहेलना से जुड़ा बताया जा रहा है। न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने संस्थान के प्रबंधन से जवाब तलब किया है कि उनके खिलाफ अदालती निर्देशों का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
संस्थान के एक शैक्षणिक कर्मचारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह कदम उठाया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद संस्थान प्रशासन ने सेवा संबंधी लाभों या पदोन्नति से जुड़े मामलों में देरी की और आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया। कोर्ट ने इस देरी को न्याय प्रक्रिया में बाधा मानते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में प्रशासनिक लापरवाही के बढ़ते मामलों पर लगाम कसने के लिए कोर्ट का यह कदम महत्वपूर्ण है। एनआईटी रायपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की कानूनी पेचीदगियां न केवल संस्थान की छवि को प्रभावित करती हैं, बल्कि कर्मचारियों के मनोबल पर भी असर डालती हैं। अब सभी की निगाहें डायरेक्टर और रजिस्ट्रार द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने वाली है, जिसमें कोर्ट यह तय करेगा कि अधिकारियों द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण पर्याप्त है या उनके खिलाफ अवमानना की औपचारिक कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। फिलहाल, इस नोटिस ने एनआईटी रायपुर के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।








