छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। शासन ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (Post-Metric Scholarship) की नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधनों को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली को अधिक सुगम, पारदर्शी और समावेशी बनाना है। नए संशोधनों के तहत आय सीमा और पात्रता मानदंडों में कुछ ढील दी गई है, जिससे अब राज्य के हजारों अतिरिक्त छात्र इस योजना के दायरे में आ सकेंगे और अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
नियमों में किए गए बदलावों के अनुसार, अब आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और 'पेपरलेस' बनाने पर जोर दिया गया है। इससे पहले छात्रों को कई तरह के भौतिक दस्तावेजों के सत्यापन के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब आधार आधारित प्रमाणीकरण और पोर्टल के सरलीकरण से यह काम घर बैठे संभव होगा। इसके अलावा, छात्रवृत्ति राशि के भुगतान में होने वाली देरी को कम करने के लिए 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाया गया है, ताकि पैसा सीधे छात्रों के बैंक खातों में समय पर पहुँच सके।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन बदलावों से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि उन पात्र छात्रों की पहचान करना भी आसान होगा जो तकनीकी कारणों से लाभ से वंचित रह जाते थे। इस निर्णय का छात्र संगठनों और अभिभावकों ने स्वागत किया है। सरकार का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह के सुधारात्मक कदम उठाने से राज्य का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) बढ़ेगी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी छात्र अपनी उच्च शिक्षा के सपनों को बिना किसी वित्तीय बाधा के पूरा कर सकेंगे।








