महासमुंद रेलवे स्टेशन इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के कारण सुर्खियों में है। यहाँ आने वाले यात्रियों को टिकट लेने के लिए घंटों जद्दोजहद करनी पड़ रही है क्योंकि अक्सर टिकट काउंटरों से कर्मचारी गायब रहते हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यात्रियों को अपनी ट्रेन पकड़ने की जल्दी होती है, लेकिन काउंटर पर किसी के न होने या लंबी कतारों के चलते कई बार उनकी ट्रेन छूट जाती है। यह लापरवाही न केवल यात्रियों का समय बर्बाद कर रही है, बल्कि रेलवे के राजस्व को भी प्रभावित कर रही है क्योंकि कई यात्री मजबूरी में बिना टिकट यात्रा करने या यात्रा रद्द करने के लिए विवश हैं।
यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं की कमी के साथ-साथ कर्मचारियों का व्यवहार भी सहयोगात्मक नहीं है। शिकायत पुस्तिका में दर्जनों शिकायतों के बावजूद अब तक रेल प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वरिष्ठ नागरिकों और दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी कष्टदायक हो जाती है, जिन्हें घंटों तक खिड़की पर कर्मचारियों के लौटने का इंतजार करना पड़ता है। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सेवाओं को सुगम बनाने की बात हो रही है, वहीं महासमुंद जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर ऐसी मैनुअल लापरवाही स्टेशन मास्टर और उच्च अधिकारियों की मॉनिटरिंग पर बड़े सवालिया निशान लगाती है।
इस मामले में यात्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही टिकट काउंटरों पर कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई और अव्यवस्थाओं को दूर नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। रेल यात्रियों की मांग है कि पीक ऑवर्स के दौरान काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाए और लापरवाह कर्मचारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद रेलवे विभाग की नींद टूटती है या यात्रियों की परेशानी ऐसे ही बरकरार रहती है।







