रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CGHB) द्वारा निर्मित 9 बड़ी कॉलोनियों के हैंडओवर की प्रक्रिया तकनीकी और प्रशासनिक उलझनों में फंस गई है। इन कॉलोनियों को नगर पालिक निगम को सौंपा जाना था, ताकि वहां की बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और सफाई का जिम्मा स्थानीय प्रशासन संभाल सके। हालांकि, राज्य शासन की ओर से स्पष्ट गाइडलाइन और फंड ट्रांसफर की शर्तों के अभाव में यह फाइल फाइलों में ही दबी हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, इन 9 कॉलोनियों में हजारों परिवार निवास कर रहे हैं। नियमतः निर्माण पूरा होने और एक निश्चित अवधि के बाद हाउसिंग बोर्ड को ये कॉलोनियां नगर निगम को हैंडओवर कर देनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि न तो हाउसिंग बोर्ड इनका रखरखाव कर रहा है और न ही नगर निगम इन्हें अपने अधिकार क्षेत्र में ले रहा है। इस 'खींचातानी' के बीच आम जनता पिस रही है। टूटी सड़कें, खराब स्ट्रीट लाइटें और ड्रेनेज की समस्या रहवासियों के लिए जी का जंजाल बन गई है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि जब तक शासन हैंडओवर के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधानों और परिसंपत्तियों के ट्रांसफर की नई गाइडलाइन जारी नहीं करता, तब तक वे इन कॉलोनियों को स्वीकार नहीं कर सकते। दूसरी ओर, हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि उन्होंने अपनी प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। इस देरी के कारण रखरखाव का बजट भी आवंटित नहीं हो पा रहा है, जिससे कॉलोनियों की हालत दिन-ब-दिन खराब हो रही है।
रायपुर की इन प्रभावित कॉलोनियों के रहवासी संघों ने कई बार विभाग और शासन को ज्ञापन सौंपा है। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि वे भी अन्य नगर निगम क्षेत्रों की तरह बुनियादी सुविधाओं का लाभ उठा सकें। फिलहाल, अब सबकी निगाहें शासन की अगली कैबिनेट या विभागीय बैठक पर टिकी हैं, जहाँ से नई गाइडलाइन जारी होने की उम्मीद है।








