छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में निवेश और प्रॉपर्टी के नाम पर धोखाधड़ी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। सरस्वती नगर थाना क्षेत्र में संभव ट्यूब्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर विकास कुमार गोयल से 11 करोड़ 51 लाख रुपये की ठगी की गई है। इस सनसनीखेज मामले में हाई-टेक एब्रेसिव्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टरों और एक प्रॉपर्टी ब्रोकर पर गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है।
बंधक जमीन को बताया विवाद-मुक्त
घटना की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई, जब आरोपियों ने कारोबारी विकास गोयल से संपर्क किया। उन्होंने उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित 55 एकड़ जमीन को बेचने का प्रस्ताव दिया। आरोपियों ने पूरी चतुराई से पीड़ित को विश्वास दिलाया कि यह जमीन पूरी तरह से विवाद-मुक्त और बैंक के किसी भी बंधक (Mortgage) से मुक्त है। भरोसे में आकर पीड़ित ने सौदे को अंतिम रूप देने के लिए अलग-अलग किश्तों में आरटीजीएस (RTGS) और चेक के माध्यम से कुल 11.51 करोड़ रुपये आरोपियों के खाते में ट्रांसफर कर दिए।
ऐसे खुला धोखाधड़ी का खेल
पैसे ट्रांसफर होने के कुछ समय बाद जब पीड़ित ने जमीन के दस्तावेजों की गहराई से जांच की, तो सच्चाई सामने आई। पता चला कि वह जमीन पहले से ही बैंक में गिरवी रखी हुई थी और उस पर भारी लोन बकाया था। जब विकास गोयल ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी और बाद में फोन उठाना भी बंद कर दिया। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस की शरण ली। सरस्वती नगर पुलिस ने बीएनएस (BNS) की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें नारायण प्रसाद, राघवेंद्र चंद, नीना जैन समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस की 'सेंसिटिव मोड' में जांच
मामले की गंभीरता और बड़ी रकम को देखते हुए पुलिस ने इस केस को 'सेंसिटिव मोड' में डाल दिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं और पुलिस तकनीकी साक्ष्यों की मदद ले रही है। रायपुर में हाल के महीनों में प्रॉपर्टी फ्रॉड के बढ़ते मामलों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने आम जनता और कारोबारियों से अपील की है कि किसी भी बड़ी प्रॉपर्टी डील से पहले टाइटल सर्च, बैंक स्टेटस और कानूनी जांच अनिवार्य रूप से कराएं ताकि ऐसे आर्थिक अपराधों से बचा जा सके।








