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Raipur News : "कारीगरी बचेगी तभी बढ़ेगा कश्मीर: सांसद बृजमोहन ने फूड प्रोसेसिंग और हाइड्रो पावर जैसे बड़े उद्योगों के जरिए आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर का दिया रोडमैप"

Raipur News : रायपुर/पहलगाम (जम्मू और कश्मीर) 27 अप्रैल, 2026 : रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल सोमवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में प्राक्कलन समिति (Estimate Committee) की एक महत्वपूर्ण अध्ययन यात्रा में शामिल हुए।

"एमएसएमई और भारी उद्योग क्षेत्र के संवर्धन में बैंकों की भूमिका" विषय पर आयोजित इस अनौपचारिक चर्चा में वित्त मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, एसबीआई, जम्मू एवं कश्मीर बैंक और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इस दौरान अग्रवाल ने प्रदेश के आर्थिक विकास, बैंकिंग सेवाओं की सुस्ती और युवाओं के रोजगार को लेकर केंद्र व राज्य प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखी।
बैठक के दौरान सांसद बृजमोहन ने धारा 370 हटने के बाद की प्रगति का विश्लेषण करते हुए कई प्रश्न उठाए।
*बैंकिंग डिस्पर्समेंट में गिरावट पर चिंता*
सांसद अग्रवाल ने सवाल उठाया कि, वर्ष 2023-24 की तुलना में वर्ष 2025-26 में ऋण वितरण (Loan Disbursement) में कमी क्यों आई है? उन्होंने बैंकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुद्रा और स्वनिधि जैसी योजनाओं में कागजी रजिस्ट्रेशन तो हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर पैसा पहुंचने की गति अत्यंत धीमी है। उन्होंने बैंकों से ₹5 लाख, ₹10 लाख और ₹20 लाख के ऋणों का अलग-अलग विवरण मांगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितने लोगों को बड़ा लाभ मिल रहा है।
*कौशल विकास और पारंपरिक कारीगरी का संरक्षण*
अग्रवाल ने स्थानीय युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास (Skill Development) की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, "हमारी पारंपरिक कारीगरी दम तोड़ रही है। बड़े लोग इस क्षेत्र पर कब्जा कर रहे हैं और छोटे कारीगर पिछड़ रहे हैं।"
उन्होंने विभाग से पूछा कि पारंपरिक कला को जीवित रखने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौन सी नई योजनाएं शुरू की गई हैं।
*एग्रीकल्चर से आगे: फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स पर जोर*
सांसद ने कहा कि केवल खेती से आर्थिक स्थिति नहीं सुधरेगी। जम्मू-कश्मीर में फलों और सब्जियों की प्रचुरता है, लेकिन प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी है। उन्होंने एसबीआई, जेके बैंक और उद्योग विभाग से पूछा कि वे राज्य की विशिष्ट संपदा को प्रोसेस कर वैल्यू एडिशन करने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहे हैं।
*धारा 370 के बाद नई पहचान और रोजगार*
बृजमोहन जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "धारा 370 खत्म होने और आतंकवाद पर लगाम लगने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती यहां के लोगों को देश की मुख्यधारा के साथ एकात्म करना है।" उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे ऐसी योजनाएं बनाएं जिससे युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। उन्होंने हिमाचल की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर में बड़े हाइड्रो पावर प्लांट लगाने और बड़े उद्योगों की संभावनाओं पर विचार करने का सुझाव दिया।
*विश्वकर्मा योजना और 'न्यू जम्मू-कश्मीर' का विजन*
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 13,000 रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद कम वितरण पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने समिति के चेयरमैन (जो स्वयं कश्मीर से हैं) के समक्ष प्रस्ताव रखा कि एमएसएमई के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए एक विशेष रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।
बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंक और विभाग मिलकर जम्मू-कश्मीर के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाएं। जब तक हम युवाओं को स्किल और रोजगार से नहीं जोड़ेंगे, तब तक विकास की परिकल्पना अधूरी है।"







