छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून की रक्षा करने वाली खाकी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के टिकरापारा थाने में पदस्थ एक महिला प्रधान आरक्षक पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। महिला पुलिसकर्मी पर आरोप है कि उन्होंने एक संगीन अपराध के आरोपी को लाभ पहुँचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया और नियमों की धज्जियां उड़ाईं।
दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के आरोपी से सांठगांठ
पूरा मामला एक दुष्कर्म और पाक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज प्रकरण से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, महिला प्रधान आरक्षक आरोपी के संपर्क में थीं और जांच को प्रभावित करने या उसे राहत देने के लिए सांठगांठ कर रही थीं। जब इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुँची और शुरुआती जांच में तथ्यों की पुष्टि हुई, तो विभाग ने इसे 'खाकी को शर्मसार' करने वाली घटना माना।
एसएसपी संतोष सिंह की सख्त कार्रवाई
रायपुर एसएसपी संतोष सिंह ने अनुशासनहीनता और अनैतिक गतिविधियों में संलिप्तता पाए जाने पर महिला प्रधान आरक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) में अटैच कर दिया गया है। एसएसपी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार या अपराधियों के प्रति नरम रुख रखने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और आंतरिक जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाक्सो जैसे गंभीर मामलों में, जहाँ पीड़ित को न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए, वहां एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा आरोपी का साथ देना बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में विभागीय जांच के साथ-साथ न्यायिक कार्रवाई की भी माँग की है।
विभागीय जांच जारी
फिलहाल, इस मामले की विस्तृत विभागीय जांच (Departmental Inquiry) जारी है। जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इस सांठगांठ में कोई वित्तीय लेन-देन हुआ था या विभाग के अन्य लोग भी इसमें शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।








