Raipur: छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध राजिम कुंभ कल्प मेले में कुप्रबंधन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा विधायक रोहित साहू ने गरियाबंद जिला प्रशासन और इवेंट कंपनी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। विधायक ने कैमरे के सामने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि मेले में जनप्रतिनिधियों और कलाकारों को पीने के पानी तक के लिए तरसना पड़ रहा है, जो कि सरकार और इस पवित्र आयोजन की गरिमा के खिलाफ है। अधिकारियों की इस बदइंतजामी से न केवल व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि शासन की फजीहत भी हो रही है।
मेले की व्यवस्थाओं में सुधार के दावों के बीच लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे पहले पत्रकारों और आम नागरिकों ने भी इवेंट कंपनी के कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार और अनावश्यक रोक-टोक के आरोप लगाए थे। विधायक रोहित साहू ने इन शिकायतों पर पहले ही अधिकारियों को चेतावनी दी थी, लेकिन सुधार के बजाय अगले ही दिन कलाकारों के साथ हुए दुर्व्यवहार ने प्रशासन की कार्यशैली पर मुहर लगा दी। विधायक ने साफ किया कि कोई भी एजेंसी अगर इस आस्था के केंद्र की छवि धूमिल करेगी तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
शर्मनाक स्थिति तब निर्मित हुई जब मुख्य मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने आए कलाकारों को कार्यक्रम खत्म होने के बाद करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार कराया गया। उन्हें भोजन तो दूर, पर्याप्त पानी तक मुहैया नहीं कराया गया। इस दुर्व्यवहार की खबर मिलते ही विधायक रोहित साहू तुरंत मौके पर पहुंचे। जब उन्होंने अधिकारियों और इवेंट कंपनी के प्रतिनिधियों से इस अव्यवस्था पर जवाब मांगा, तो उनके पास कोई संतोषजनक उत्तर नहीं था, जिससे विधायक का पारा और चढ़ गया।
नाराजगी जाहिर करने के साथ ही विधायक रोहित साहू ने मानवीय संवेदनशीलता की एक बड़ी मिसाल पेश की। उन्होंने भूखे-प्यासे कलाकारों को अपने साथ लिया और एक निजी रेस्टोरेंट ले जाकर उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराया। विधायक ने इस दौरान कहा कि "कलाकार हमारी संस्कृति की पहचान हैं और उनका सम्मान सर्वोपरि है।" उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को अंतिम चेतावनी दी कि श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सेवा में किसी भी तरह की कोताही अब बर्दाश्त नहीं होगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन और इवेंट कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां विधायक के इस संवेदनशील कदम की जनता और कलाकारों के बीच सराहना हो रही है, वहीं शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी असंतोष देखा जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस कड़ी फटकार के बाद आने वाले दिनों में मेले की व्यवस्थाओं में कितना सुधार आता है और लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।








