छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में विकास की एक नई और ऐतिहासिक इबारत लिखी गई है। अब तक कच्चे रास्तों, दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के कारण जो गाँव अंधकार में डूबा रहता था, वहाँ पहली बार बिजली की रोशनी पहुँची है। शासन और प्रशासन के कठिन प्रयासों से अब उस गाँव के निवासियों का सालों पुराना सपना साकार हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि वे अब तक पूरी तरह से अंधेरे पर निर्भर थे।
इस दुर्गम इलाके में बिजली पहुँचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, जहाँ मशीनरी और वाहनों का पहुँचना लगभग असंभव सा था। भारी कठिनाइयों के बावजूद, ₹56 लाख की लागत से इस विद्युतीकरण प्रोजेक्ट को पूरा किया गया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्राकृतिक बाधाओं के बीच बिजली विभाग की टीम ने कड़ी मेहनत की, जंगल और ऊबड़-खाबड़ रास्तों को पार करते हुए गाँव तक खंभे और तार पहुँचाए, जिससे यह नामुमकिन दिखने वाला काम मुमकिन हो पाया।
बिजली आने से गाँव की तस्वीर अब पूरी तरह बदल जाएगी। यहाँ के बच्चे अब बेहतर रोशनी में पढ़ाई कर सकेंगे और ग्रामीणों को जंगली जानवरों के खौफ तथा अंधेरे से मुक्ति मिलेगी। यह विद्युतीकरण न केवल गाँव को आधुनिकता से जोड़ रहा है, बल्कि शासन के 'हर घर बिजली' के संकल्प को भी मजबूती दे रहा है। ग्रामीणों ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा है कि अब उनके जीवन में नई उम्मीदों का संचार हुआ है और वे मुख्यधारा से जुड़ गए हैं।








