Raipur: छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला लेवी और शराब घोटाले में आरोपी निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया ने अपनी रिहाई के लिए अब हाई कोर्ट में कानूनी मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या ने बिलासपुर हाई कोर्ट में एक साथ दो अलग-अलग जमानत याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य शासन (EOW/ACB) से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 20 फरवरी 2026 तक अपना विस्तृत जवाब पेश करने का कड़ा निर्देश दिया है।
सौम्या चौरसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल को बार-बार नई FIR दर्ज कर गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अब तक उन्हें 6 बार अलग-अलग मामलों में हिरासत में लिया जा चुका है, जो उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। सौम्या के वकीलों का कहना है कि वे लंबे समय से जेल में हैं और मामले की जांच में सहयोग कर रही हैं, ऐसे में उन्हें नियमित जमानत का लाभ मिलना चाहिए। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उन्हें हाई कोर्ट जाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद यह याचिकाएं लगाई गई हैं।
दूसरी ओर, जांच एजेंसियों (ED और EOW) का शिकंजा सौम्या पर कसता जा रहा है। ED ने उन पर शराब घोटाले में 115 करोड़ रुपये के 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' (अपराध की कमाई) में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया है। एजेंसियों का दावा है कि सौम्या चौरसिया उस सिंडिकेट की एक महत्वपूर्ण कड़ी थीं, जिसने राज्य के खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुँचाया। जांच अधिकारियों का तर्क है कि सौम्या एक बेहद प्रभावशाली अधिकारी रही हैं और जेल से बाहर आने पर वे गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं या सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं।
छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इस मामले को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। 20 फरवरी को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या सौम्या को इस बार राहत मिलेगी या उन्हें अभी और वक्त सलाखों के पीछे गुजारना पड़ेगा। इससे पहले निचली अदालतों और हाई कोर्ट से उनकी कई जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। इस बार हाई कोर्ट का रुख क्या रहता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह मामला आने वाले समय में कई बड़े चेहरों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।








