नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) इस समय अपने सबसे चुनौतीपूर्ण और 'क्रूर' दौर से गुजर रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। बाजार की इस अनिश्चितता के बीच एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है— निवेशक अब जोखिम भरे शेयरों से हाथ खींचकर सोने और चांदी (Gold & Silver) की ओर रुख कर रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि आने वाली आर्थिक मंदी या अस्थिरता के 'खतरे की घंटी' है।
एक्सपर्ट्स की राय: क्यों है यह 'खतरनाक' संकेत?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब निवेशक इक्विटी (Shares) छोड़कर बुलियन (Gold/Silver) में निवेश बढ़ाते हैं, तो इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण होते हैं:
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया भर में जारी युद्ध और तनाव की स्थितियों ने निवेशकों को डरा दिया है। सोना हमेशा संकट के समय 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven) माना जाता है।
महंगाई और मंदी का डर: शेयर बाजार तब गिरता है जब कंपनियों के मुनाफे और अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर संदेह हो। ऐसे में निवेशक अपनी पूंजी बचाने के लिए सोने को ढाल बनाते हैं।
डॉलर और ब्याज दरें: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और डॉलर की मजबूती ने उभरते बाजारों (Emerging Markets) से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया है।
सोना और चांदी क्यों बन रहे पहली पसंद?
हाल के हफ्तों में सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखी गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) के कारण निवेशकों का पोर्टफोलियो लाल निशान में है। ऐसे में गोल्ड उन्हें स्थिरता प्रदान कर रहा है। चांदी, जिसका उपयोग इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी बढ़ रहा है, अब निवेशकों को सोने से भी बेहतर रिटर्न दे रही है।
निवेशकों को सलाह:
विशेषज्ञों का कहना है कि "इतिहास गवाह है कि जब-जब शेयर बाजार धराशायी हुआ है, सोने ने अपनी चमक बिखेरी है।" हालांकि, वे यह भी चेतावनी देते हैं कि निवेशकों को सारा पैसा एक ही जगह लगाने के बजाय अपने निवेश को डाइवर्सिफाई (Diversify) करना चाहिए।








