छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक घूम रहे कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) की कमी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों के झुंड राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं, जिससे आमजन में भय का माहौल है। कई इलाकों में लोग सुबह-शाम घर से निकलने में भी असहज महसूस कर रहे हैं।
अस्पतालों में वैक्सीन की कमी
डॉग बाइट के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद जिले के अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे पीड़ितों और उनके परिजनों को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल
स्थानीय नागरिकों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि कुत्तों की रोकथाम, पकड़ने और नसबंदी जैसे अभियान प्रभावी ढंग से संचालित नहीं किए जा रहे हैं, जिसके कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से आवारा कुत्तों की समस्या पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई, अस्पतालों में पर्याप्त एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराने और डॉग बाइट की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है।







