सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग स्थित सुकमा जिले में पिछले चार दशकों से चले आ रहे लाल आतंक के दौर का आज ऐतिहासिक अंत हो गया है। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन, 31 मार्च 2026 को संगठन की अंतिम दो सक्रिय महिला माओवादियों ने पुलिस और सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वाली इन दोनों महिला कैडरों पर शासन की ओर से 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके सरेंडर के साथ ही सुकमा जिले को आधिकारिक तौर पर माओवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाली ये महिला माओवादी लंबे समय से संगठन की 'कंपनी नंबर 08' में पार्टी सदस्य के रूप में सक्रिय थीं और पड़ोसी राज्य ओडिशा के केकेबीएन (KKBN) डिवीजन में भी नेटवर्क का संचालन कर रही थीं। रक्षित आरक्षी केंद्र (DRC) सुकमा में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इन्होंने अपने हथियार डाले। इस दौरान पुलिस ने जंगलों से भारी मात्रा में स्वचालित हथियार और लगभग 10 लाख रुपये नकद भी बरामद किए हैं, जिसे संगठन द्वारा डंप किया गया था।
सुकमा पुलिस अधीक्षक (SP) किरण चव्हाण ने इस मौके पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सुकमा जिले के लिए आज का दिन गौरवशाली है। उन्होंने बताया कि सरकार की 'पुनर्वास नीति' और 'पूना मार्गेम' (नया रास्ता) पहल से प्रभावित होकर माओवादी लगातार मुख्यधारा में लौट रहे थे। इन अंतिम दो प्रमुख गिरफ्तारियों/सरेंडर के बाद अब जिले में सक्रिय माओवादी कैडरों की उपस्थिति शून्य हो गई है। हालांकि, सुरक्षा के मद्देनजर जंगलों में रूटीन सर्चिंग ऑपरेशन और विकास कार्य पहले की तरह जारी रहेंगे।
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने भी इस सफलता को सुरक्षाबलों और स्थानीय जनता की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि सुदूर अंचलों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना और सड़क कनेक्टिविटी पहुँचने से माओवादियों का आधार पूरी तरह खत्म हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा लक्ष्य 'मार्च 2026 तक नक्सलवाद का खात्मा' की दिशा में सुकमा का नक्सल मुक्त होना एक निर्णायक मील का पत्थर साबित होगा। अब प्रशासन का पूरा ध्यान इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर रहेगा।








