रायपुर: भारत की आत्मा यहाँ के गांवों में बसती है, और छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह बात और भी सटीक और सार्थक नजर आती है। छत्तीसगढ़ को देश में “धान का कटोरा” कहा जाता है, और इस कटोरे की समृद्धि से ही पूरे प्रदेश का सौभाग्य और विकास जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार का मानना है कि किसानों की खुशहाली ही छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का असली आधार है। यही वजह है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए धरातल पर लगातार बड़े और दूरगामी फैसले लिए जा रहे हैं।
वर्तमान में बिगड़ते वैश्विक हालात, खेती-किसानी की लगातार बढ़ती लागत और रासायनिक उर्वरकों की अनिश्चित आपूर्ति ने कृषि कार्य को पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे माल की कमी और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं के कारण पारंपरिक उर्वरकों की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे आम किसानों के लिए खेती की लागत को वहन करना एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
ऐसी विपरीत और विषम परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कृषि क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। राज्य सरकार अब किसानों को पारंपरिक खादों के भारी-भरकम और महंगे जाल से निकालकर 'नैनो यूरिया' और 'नैनो डीएपी' जैसी अत्याधुनिक नैनो तकनीक को अपनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रेरित कर रही है। यह तकनीक न केवल किफायती है, बल्कि इसे खेतों में इस्तेमाल करना और लाना-ले जाना भी बेहद आसान है।
इस 'नैनो क्रांति' के आने से न सिर्फ फसलों की उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि हो रही है, बल्कि मिट्टी की सेहत और प्राकृतिक उर्वरता भी बनी हुई है। कम मात्रा में अधिक असर दिखाने वाले इन आधुनिक उर्वरकों के उपयोग से पर्यावरण को होने वाले नुकसान में भी कमी आ रही है। मुख्यमंत्री साय की इस तकनीक-आधारित सोच ने प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक के किसानों को एक नया वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिया है।
तकनीकी रूप से सुदृढ़ हो रहा छत्तीसगढ़ का किसान अब कम लागत में अधिक मुनाफा कमाकर 'मेगा समृद्धि' की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। खेती में आ रहे इस आधुनिक बदलाव और मुख्यमंत्री साय की दूरदर्शी नीति की बदौलत आज राज्य का कृषि क्षेत्र पूरे देश में एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई और ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाएगा।







