रायगढ़: आज के दौर में जहां युवा सालों-साल सरकारी नौकरी की तैयारी में खपा देते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के आकाश डिक्सेना ने एक अलग राह चुनी है। सरकारी नौकरी का मोह त्याग कर आकाश ने स्वरोजगार को अपना जरिया बनाया और आज वे 'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना' (PMEGP) की मदद से सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। उनकी यह कहानी उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखते हैं।
आकाश बताते हैं कि एक समय वह भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे थे, लेकिन मन में हमेशा से खुद का कुछ करने का जुनून था। बाजार की मांग और अपनी रुचि को देखते हुए उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। हालांकि, शुरुआती पूंजी एक बड़ी बाधा थी, लेकिन केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना' उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई।
योजना के तहत बैंक से ऋण और सरकार से मिली सब्सिडी की मदद से आकाश ने अपनी यूनिट स्थापित की। कम समय में ही उनकी मेहनत रंग लाई और उनका व्यवसाय न केवल जम गया, बल्कि अब वे अपने क्षेत्र के अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करा रहे हैं। आकाश का कहना है कि "नौकरी मांगने वाला बनने से बेहतर, नौकरी देने वाला बनना" उन्हें अधिक मानसिक संतोष देता है।
आकाश डिक्सेना की इस उपलब्धि पर स्थानीय जिला प्रशासन और उद्योग विभाग ने भी उनकी सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि पीएम रोजगार सृजन योजना का मुख्य उद्देश्य ही आकाश जैसे ऊर्जावान युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उचित मार्गदर्शन और सरकारी सहायता मिलने पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवा स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर बड़े उद्यमी बन सकते हैं।
आज आकाश डिक्सेना की सफलता केवल उनकी निजी तरक्की नहीं, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की एक जीवंत तस्वीर है। वह न केवल खुद आर्थिक रूप से स्वतंत्र हुए हैं, बल्कि अपने गांव और समाज के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरे हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और सही सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो सफलता के आसमान को छुआ जा सकता है।








