गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के परसूली वन परिक्षेत्र में इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन हाल ही में हुई एक घटना ने प्रशासनिक संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दी हैं। जानकारी के अनुसार, जंगल गए एक ग्रामीण पर भालू ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया। भालू के पंजों से बुरी तरह जख्मी हुआ पति जमीन पर तड़पता रहा और उसकी पत्नी बिलख-बिलखकर लोगों से उसे बचाने की गुहार लगाती रही, लेकिन मौके पर मौजूद वन विभाग की टीम की भूमिका ने सबको हैरान कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का आरोप है कि जब मदद की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वन विभाग के कर्मचारी रेस्क्यू करने या घायल को तत्काल अस्पताल पहुँचाने के बजाय मोबाइल से फोटो खींचने और औपचारिकताएं पूरी करने में व्यस्त रहे। इस संवेदनहीनता को देखकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। घायल की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था, वह बार-बार अधिकारियों के आगे हाथ जोड़ती रही, लेकिन सिस्टम की सुस्ती के कारण इलाज मिलने में देरी हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में भालू और अन्य जंगली जानवरों का आतंक काफी समय से बना हुआ है, जिसकी शिकायत कई बार की जा चुकी है। इसके बावजूद विभाग न तो गश्त बढ़ा रहा है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रहा है। ऊपर से हादसे के वक्त कर्मचारियों का ऐसा रवैया जले पर नमक छिड़कने जैसा है। घायल की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
इस घटना के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने मामले की जांच की बात कही है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या विभाग के लिए किसी की जान से ज्यादा उसकी हादसे वाली फोटो जरूरी है? स्थानीय संगठनों ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार के लिए तत्काल मुआवजे की मांग की है।








