CG News- छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के आगाज के साथ ही गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगाई का एक बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की फीस में भारी और अप्रत्याशित बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। इसके तहत हाई स्कूल (कक्षा 9वीं-10वीं) और हायर सेकेंडरी (कक्षा 11वीं-12वीं) में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सालाना फीस को सीधे 460 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है। अचानक की गई इस बढ़ोतरी ने सरकारी स्कूलों के भरोसे अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है।
दुर्ग जिले में फीस हुई दोगुनी से भी ज्यादा, पैरेंट्स परेशान
इस फैसले का सबसे बड़ा असर दुर्ग जिले समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में देखा जा रहा है, जहां इस सत्र से शुल्क में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस अप्रत्याशित फीस वृद्धि ने आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूर वर्ग के परिवारों की चिंताएं बेहद बढ़ा दी हैं। कई पालकों (अभिभावकों) का स्पष्ट कहना है कि एक तरफ जहाँ वे रोज़ी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में इस तरह फीस बढ़ना उनके बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के आड़े आ सकता है। कई परिवारों के सामने अब बच्चों की पढ़ाई छुड़वाने या कर्ज लेने जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई है।
शिक्षा के अधिकार और समान अवसर के दावों पर छिड़ी बहस
सरकारी स्कूलों में फीस बढ़ाने के इस सरकारी आदेश के बाद अब प्रदेशभर में एक नई बहस छिड़ गई है। शिक्षाविदों, समाजसेवियों और छात्र संगठनों ने सरकार के इस कदम की आलोचना शुरू कर दी है। आलोचकों का कहना है कि एक तरफ सरकार 'शिक्षा के अधिकार' (RTE) और सभी को 'समान अवसर' देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी व्यवस्था में ही फीस को इस तरह बढ़ाना विरोधाभासी है। इस नीतिगत फैसले को लेकर अब सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक आम जनता और प्रशासन के बीच असंतोष साफ देखा जा सकता है।








