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कभी भाजपा से अलग होकर सपा से सांसद बने थे बृजभूषण शरण सिंह, अब कैसे पूरी करेंगे दोबारा लोकसभा पहुंचने की कसम?
अखिलेश यादव की तारीफ से सियासी हलचल, बीजेपी से टिकट नहीं मिला तो सपा बन सकती है विकल्प

लखनऊ/गोंडा।

उत्तर प्रदेश की राजनीति के दबंग नेताओं में शुमार बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर सियासी सुर्खियों में हैं। उन्होंने कहा है कि अगर वह जिंदा रहे तो एक बार फिर सांसद बनकर लोकसभा जरूर जाएंगे। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि बृजभूषण अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं, और अगर लड़ेंगे तो किस पार्टी के टिकट से।
कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक पॉडकास्ट के दौरान दावा किया कि उन्हें साजिश के तहत लोकसभा से बाहर किया गया। उन्होंने कहा कि लोकसभा से हटाए जाने का अपमान उनके लिए एक घाव है, जिसे वह दोबारा सांसद बनकर ही भरेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव कहां से लड़ना है, यह जनता तय करेगी, लेकिन उनकी प्राथमिकता बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ने की रहेगी।
टिकट कटा, बेटे को मिला मौका
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते बीजेपी ने बृजभूषण का टिकट काट दिया था। पार्टी ने उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज से उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने चुनाव जीतकर सीट बीजेपी के खाते में बरकरार रखी।
अखिलेश यादव की तारीफ से बढ़ी सियासी हलचल
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब वह मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, तब अखिलेश यादव ने उनके खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा। बृजभूषण ने कहा, “मैं अखिलेश यादव का यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा।”
इस बयान के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि अगर बीजेपी से बात नहीं बनी तो बृजभूषण के लिए समाजवादी पार्टी एक विकल्प हो सकती है। खास बात यह है कि बृजभूषण पहले भी बीजेपी छोड़कर सपा के टिकट पर लोकसभा पहुंच चुके हैं।
बीजेपी से सपा और फिर वापसी
बृजभूषण शरण सिंह ने 1991 में गोंडा से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा में एंट्री की थी। बाद में पार्टी से मतभेद बढ़ने पर 2008 में वह सपा में शामिल हो गए और 2009 में कैसरगंज से सांसद बने। 2014 में नरेंद्र मोदी लहर के दौरान उन्होंने बीजेपी में वापसी की और कैसरगंज से लगातार दो चुनाव भारी अंतर से जीते।
देवीपाटन मंडल में मजबूत पकड़
बृजभूषण शरण सिंह का देवीपाटन मंडल—गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती—में खासा राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव माना जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके कई संस्थान हैं और यही नेटवर्क उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत बनाता है।
अब सवाल—कसम कैसे होगी पूरी?
फिलहाल लोकसभा चुनाव में समय बाकी है, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह के ताजा बयान ने यूपी की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है। बड़ा सवाल यही है कि वह बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ेंगे, सपा का रुख करेंगे या कोई नया रास्ता चुनेंगे—और क्या वह दोबारा लोकसभा पहुंचने की अपनी कसम पूरी कर पाएंगे।







