छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोंडागांव और कांकेर जिले के जंगलों में लगी भीषण आग ने वन संपदा को भारी नुकसान पहुँचाया है। सूखी पत्तियों और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे वन विभाग के अमले में हड़कंप मच गया है। कई हेक्टेयर में फैली इस आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग की टीमें जुटी हुई हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण फायर फाइटिंग ऑपरेशंस में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वन्य जीवों के रिहायशी इलाकों की ओर पलायन का खतरा भी बढ़ गया है।
वहीं दूसरी ओर, धमतरी जिले के कृषि क्षेत्रों से बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहाँ खेतों में अचानक भड़की आग ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया। धमतरी के ग्रामीण इलाकों में आग लगने से तैयार खड़ी चना, गेहूं और सरसों की फसलें पूरी तरह जलकर खाक हो गई हैं। किसानों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर नहीं पहुँच सकीं, जिससे लपटों ने देखते ही देखते बड़े रकबे को अपनी चपेट में ले लिया। इस अग्निकांड से लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
कोंडागांव और कांकेर के वन अधिकारियों का कहना है कि वे सैटेलाइट फायर अलर्ट के जरिए आग के हॉटस्पॉट्स की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे महुआ बीनने के लिए जंगलों में आग न लगाएं, क्योंकि यही छोटी सी चिंगारी विकराल रूप धारण कर लेती है। इधर धमतरी के प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है। कृषि विभाग की टीम अब जले हुए खेतों का सर्वे कर नुकसान का आकलन करने की तैयारी में है ताकि प्रभावितों को राहत दी जा सके।
जंगलों की आग और खेतों की तबाही के इन दोहरे संकट ने राज्य सरकार को अलर्ट मोड पर ला दिया है। कांकेर और कोंडागांव के जंगलों में धुएं का गुबार दूर-दूर से देखा जा सकता है, जो पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो बहुमूल्य औषधीय पौधे और दुर्लभ लकड़ियाँ नष्ट हो सकती हैं। धमतरी में हुई फसल बर्बादी के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के ढीले तारों और शॉर्ट सर्किट की भी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।








