लोरमी क्षेत्र के विधायक और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव इन दिनों पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। अपने कांकेर दौरे के दौरान डिप्टी सीएम उस समय बेहद नाराज हो गए, जब उन्होंने विकास कार्यों की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक अधिकारियों के कागजी दावों के बीच जमीन-आसमान का अंतर देखा। सरकारी फाइलों में जिन विकास कार्यों की प्रगति को बेहतर दिखाया गया था, धरातल पर उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय और धीमी मिली। निर्माण कार्यों में इस तरह की लेटलतीफी और अधिकारियों के टालमटोल वाले रवैये को देखकर उपमुख्यमंत्री का पारा चढ़ गया।
अफसरों और ठेकेदारों की सरेआम लगाई क्लास
डिप्टी सीएम अरुण साव ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए बैठक में मौजूद लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के ठेकेदारों की सरेआम जमकर क्लास लगाई। उन्होंने कागजी बहानों को सिरे से खारिज करते हुए बेहद तल्ख और सख्त लहजे में पूछा कि 'जब आप लोगों को तय वर्क प्लान (कार्ययोजना) के मुताबिक काम करना ही नहीं है, तो फिर इसे बनाते क्यों हो? क्या यह कागजी प्लान सिर्फ मुझे और सरकार को दिखाने के लिए तैयार किया जाता है?' उपमुख्यमंत्री की इस सख्त फटकार के बाद पूरी बैठक में सन्नाटा पसर गया।
समय पर काम पूरा न होने पर ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी
उपमुख्यमंत्री ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि जनता के पैसे का दुरुपयोग और विकास कार्यों में किसी भी तरह का गैर-जिम्मेदाराना रवैया साय सरकार में कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में उतरकर नियमित मॉनिटरिंग करने और ठेकेदारों को तय समय-सीमा के भीतर काम की गुणवत्ता सुधारते हुए प्रोजेक्ट पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। अरुण साव ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि यदि अब भी कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और तय समय पर निर्माण कार्य पूरे नहीं किए गए, तो संबंधित अफसरों पर विभागीय कार्रवाई होगी और दोषी ठेकेदारों को तत्काल ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डाल दिया जाएगा।







