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मौसेरी बहन से शादी अवैध': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा—कोई भी प्रथा कानून से ऊपर नहीं

Chhattisgarh 03 May 2026 (33)

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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक रिश्तों और विवाह को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) के तहत अपनी मौसेरी बहन से विवाह करना पूरी तरह से अवैध है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा कि "कोई भी सामाजिक प्रथा या परंपरा कानून से ऊपर नहीं हो सकती।" यह फैसला एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आया जहाँ विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की गई थी।

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न्यायमूर्ति की पीठ ने मामले की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 5(v) के अनुसार, 'सपिंड' रिश्तों (Sapinda Relationships) में विवाह वर्जित है, जब तक कि उन पक्षों के बीच ऐसी कोई वैध रूढ़ि या प्रथा न हो जो इसकी अनुमति देती हो। हाईकोर्ट ने पाया कि मौसेरी बहन के साथ विवाह 'प्रतिषिद्ध नातेदारी' की श्रेणी में आता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यदि कोई प्रथा कानून के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करती है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।

इस फैसले का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के किसी भी रस्म या परंपरा को कानून के विरुद्ध ढाल नहीं बनाया जा सकता। याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने कानून की सर्वोच्चता को बरकरार रखा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सपिंड और प्रतिषिद्ध रिश्तों में होने वाली शादियों पर कानूनी स्थिति को और अधिक स्पष्ट करता है, जिससे भविष्य में ऐसे विवादों में कमी आएगी।

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