नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के कथित 2000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कानूनी घेराबंदी शुरू कर दी है। ED ने आरोपी चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से मिली जमानत के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई की तारीख 28 जनवरी 2026 तय की है।
ED की दलील: जमानत से प्रभावित हो सकती है जांच
ED ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि चैतन्य बघेल इस पूरे सिंडिकेट के एक महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं। एजेंसी का दावा है कि यदि वे बाहर रहते हैं, तो मामले के महत्वपूर्ण गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। ED का आरोप है कि शराब घोटाले से हुई अवैध कमाई (Proceeds of Crime) के प्रबंधन और निवेश में चैतन्य बघेल की सक्रिय भूमिका रही है।
क्या है पूरा शराब घोटाला?
छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच हुए इस घोटाले में ED का आरोप है कि राज्य में बिकने वाली शराब पर 'अवैध कमीशन' वसूला गया। इसमें:
सरकारी दुकानों से 'बिना ड्यूटी' वाली अवैध शराब बेची गई।
डिस्टिलरीज से प्रति पेटी कमीशन तय किया गया था।
इस अवैध वसूली से प्राप्त लगभग 2000 करोड़ रुपये का उपयोग राजनीतिक और व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया।
28 जनवरी की सुनवाई क्यों है अहम?
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली इस सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि:
कानूनी मिसाल: यदि सुप्रीम कोर्ट जमानत रद्द करता है, तो इस मामले के अन्य आरोपियों के लिए जेल से बाहर आना मुश्किल हो जाएगा।
नई कड़ियां: ED सुप्रीम कोर्ट को कुछ 'नए सबूत' सौंप सकती है जो हालिया पूछताछ और छापेमारी में मिले हैं।
राजनीतिक असर: चूंकि चैतन्य बघेल पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी सर्किल से जुड़े हैं, इसलिए इस फैसले का छत्तीसगढ़ की राजनीति पर भी गहरा असर पड़ेगा।
अब तक की कार्रवाई
इस मामले में अब तक अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और कई बड़े शराब कारोबारियों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। ED ने करोड़ों की अचल संपत्ति भी कुर्क की है। चैतन्य बघेल को निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद हाई कोर्ट से राहत मिली थी, जिसे अब ED किसी भी कीमत पर पलटना चाहती है।








