रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025' दूर-दराज के गांवों की तस्वीर बदल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष (2026-27) तक पूरे प्रदेश में 200 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में योजना के तहत 57 प्रमुख मार्गों पर बसें सफलतापूर्वक दौड़ रही हैं, जिससे आजादी के बाद पहली बार सैकड़ों गांवों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिली है।
330 गांवों तक पहली बार पहुंची बस सेवा
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक संचालित 57 रूटों के माध्यम से राज्य के लगभग 330 ऐसे गांवों को जोड़ा गया है, जहां पहले लोगों को मीलों पैदल चलना पड़ता था। योजना के पहले और दूसरे चरण में मुख्य रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासी बाहुल्य जिलों को प्राथमिकता दी गई है। सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और जशपुर जैसे जिलों में बसें चलने से छात्रों, मरीजों और ग्रामीणों के लिए जिला मुख्यालय पहुंचना अब आसान और किफायती हो गया है।
जिलावार बस संचालन की स्थिति (वर्तमान)
जिला संचालित बसें जिला संचालित बसें
सुकमा 08 बसें जशपुर 07 बसें
दंतेवाड़ा 07 बसें सूरजपुर 06 बसें
कांकेर 06 बसें कोरिया 05 बसें
नारायणपुर 04 बसें कोंडागांव 04 बसें
बस संचालकों को सरकार देगी वित्तीय सहायता
योजना को टिकाऊ बनाने के लिए सरकार निजी बस संचालकों को 'प्रति किलोमीटर' के आधार पर वित्तीय अनुदान दे रही है:
प्रथम वर्ष: 26 रुपये प्रति किमी
द्वितीय वर्ष: 24 रुपये प्रति किमी
तृतीय वर्ष: 22 रुपये प्रति किमी
इसके अतिरिक्त, ग्रामीण मार्गों पर चलने वाली इन बसों को 3 साल तक मासिक कर (Tax) से पूरी तरह छूट दी गई है, ताकि कम यात्री संख्या वाले रूटों पर भी बस सेवा जारी रहे।
पारदर्शी मार्ग चयन और भविष्य की योजना
परिवहन मंत्री केदार कश्यप के अनुसार, मार्गों का चयन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा पर किया जाता है। फिलहाल 12 नए रूटों पर निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही 15 और नए मार्गों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से अलग न रहे, जिसके लिए 2026 तक पूरे राज्य में बस नेटवर्क बिछाने की तैयारी है।








