CG NEWS : कोरबा जिले की एसईसीएल दीपका कोयला खदान एक बार फिर लापरवाही के चलते सुर्खियों में है। खदान के सुआ–भोड़ी फेस पर हुई ब्लास्टिंग के दौरान एसईसीएल कर्मी लखन पटेल (निवासी रैकी) की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे कोयला क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना के समय ब्लास्टिंग अमानक तरीके से कराई जा रही थी। सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया और न ही पर्याप्त सेफ्टी ज़ोन बनाया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ब्लास्टिंग से पहले कर्मियों को सुरक्षित दूरी पर हटाने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई, जिसके चलते लखन पटेल इसकी चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी जान चली गई।
किसके आदेश पर हुई खतरनाक ब्लास्टिंग?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना सुरक्षा इंतजामों के ब्लास्टिंग कराने का आदेश किसने दिया। कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने दीपका खदान प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यहां उत्पादन का दबाव इतना अधिक है कि सुरक्षा नियमों को बार-बार नजरअंदाज किया जा रहा है।
आक्रोश और शोक का माहौल
घटना के बाद खदान क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपका खदान में “उत्पादन पहले, सुरक्षा बाद में” की नीति खुलेआम लागू है। यदि समय रहते अमानक ब्लास्टिंग पर रोक लगाई जाती और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होती, तो एक परिवार को उजड़ने से बचाया जा सकता था।
प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर हादसे के बाद भी खदान प्रबंधन की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है और न ही जिम्मेदारी तय करने की पहल दिखाई दे रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह मामला भी पूर्व के हादसों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा, या फिर इस बार किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई होगी।








