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महासम्मेलन में बड़ा फैसला: एनएचएम कर्मियों को मिलेगी ट्रांसफर नीति और लंबित इंक्रीमेंट, ग्रेड पे के लिए बनेगी कमेटी

Chhattisgarh RRT News Desk 13 June 2026

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के हजारों संविदा और नियमित कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने राहत और सौगातों का पिटारा खोल दिया है। राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित 'छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ' के प्रदेश स्तरीय विशाल महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने शिरकत की। इस गरिमामय मंच से सरकार ने कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को सहृदयता से स्वीकार करते हुए कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं, जिससे कर्मचारियों में भारी उत्साह और जश्न का माहौल है।

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महासम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संवेनशीलता दिखाते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि एनएचएम कर्मचारियों ने पूर्व में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जो 33 दिनों की लंबी अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी, उस हड़ताल अवधि के दौरान का रुका हुआ (कटा हुआ) वेतन राज्य सरकार द्वारा पूरी तरह से जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बड़े ऐलान से हजारों स्वास्थ्य कर्मियों और उनके परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।

इसके साथ ही, कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने भी एनएचएम कर्मियों के हित में घोषणाओं की झड़ी लगा दी। स्वास्थ्य मंत्री ने मंच से आधिकारिक ऐलान किया कि कर्मचारियों को उनकी 27 प्रतिशत लंबित वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ तत्काल प्रभाव से दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एनएचएम कर्मियों के लिए एक पारदर्शी और सुव्यवस्थित 'ट्रांसफर नीति' (स्थानांतरण नीति) भी लागू की जा रही है, जिससे गृह जिलों या मनचाही जगहों पर पोस्टिंग की राह आसान होगी।

कर्मचारियों के वेतन विसंगति और ग्रेड पे के जटिल मुद्दे पर बात करते हुए स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए 'ग्रेड पे' के संबंध में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके साथ ही, एनएचएम की कार्य मूल्यांकन प्रक्रिया (Appraisal System) को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए उसमें 'दावा-आपत्ति' का एक नया कानूनी प्रावधान भी जोड़ दिया गया है, ताकि किसी भी कर्मचारी के साथ मूल्यांकन में अन्याय न हो और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा व निष्पक्ष अवसर मिल सके।

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