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नक्सलियों की साजिश नाकाम: सुरक्षा बलों ने बरामद किए 4 घातक IED, 4 नक्सली स्मारकों को भी किया जमींदोज

Chhattisgarh RRT News Desk 15 March 2026

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पखांजूर.छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर जिले के पखांजूर में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के मंसूबों पर पानी फेरते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। इलाके में चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए लगाए गए 4 शक्तिशाली आईईडी (IED) बरामद किए हैं। इसके साथ ही, माओवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए अवैध रूप से बनाए गए 4 नक्सली स्मारकों को भी सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई इलाके में नक्सलियों की पकड़ को कमजोर करने और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सीआरपीएफ (CRPF), कोबरा (CoBRA) और जिला बल की संयुक्त टीम क्षेत्र में गश्त और एरिया डोमिनेशन पर निकली थी। इसी दौरान बीजापुर के संवेदनशील अंदरूनी इलाकों में जवानों को जमीन के नीचे दबे संदिग्ध वायर और विस्फोटक होने का संकेत मिला। सतर्कता बरतते हुए बम निरोधक दस्ते (BDS) को बुलाया गया, जिन्होंने मौके पर ही 4 टिफिन आईईडी बरामद किए। इन विस्फोटकों को जवानों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से रास्तों पर लगाया गया था, जिन्हें सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया गया है।

विस्फोटकों की बरामदगी के अलावा, सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा बनाए गए 4 स्मारकों को भी चिन्हित कर उन्हें ढहा दिया। नक्सली अक्सर मारे गए अपने साथियों की याद में और ग्रामीणों के बीच अपना खौफ कायम रखने के लिए ऐसे स्मारकों का निर्माण करते हैं। प्रशासन का मानना है कि इन प्रतीकों को हटाना नक्सलियों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को खत्म करने के लिए आवश्यक है। सरकार की 'नियद नेल्लानार' योजना के तहत नए पुलिस कैंपों की स्थापना के बाद से सुरक्षा बल अब उन कोर इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जो पहले नक्सलियों के अघोषित किले माने जाते थे।

बस्तर आईजी और बीजापुर एसपी ने इस सफल ऑपरेशन के लिए जवानों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। बरामद आईईडी की क्षमता इतनी अधिक थी कि यह किसी भी बड़े वाहन या गश्ती दल को भारी नुकसान पहुंचा सकती थी। फिलहाल, इलाके में सर्चिंग तेज कर दी गई है और सुरक्षा बल संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहे हैं। ग्रामीणों ने भी इस प्रशासनिक सक्रियता पर संतोष जताया है, क्योंकि नक्सलियों द्वारा लगाए गए ये आईईडी अक्सर स्थानीय लोगों और उनके मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित होते रहे हैं।

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