रायपुर: छत्तीसगढ़ की साय सरकार का आगामी बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस बार राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश करने की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट का अनुमानित आकार लगभग ₹2 लाख करोड़ रहने वाला है। इस सत्र में सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं को रफ्तार देना है, जिससे प्रदेश के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
इस बार के बजट सत्र में केवल वित्तीय आंकड़े ही नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी बदलाव भी चर्चा का केंद्र रहेंगे। सरकार इस सत्र में बहुप्रतीक्षित धर्मांतरण विरोधी कानून (मंतातरण विरोधी विधेयक) पेश करने की तैयारी में है। राज्य में पिछले कुछ समय से धर्मांतरण एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, और इस नए कानून के जरिए सरकार सख्त प्रावधान लागू करने की कोशिश करेगी। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है, जिससे सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं।
आर्थिक जानकारों की मानें तो इस बजट में किसानों, युवाओं और महतारी वंदन योजना के अगले चरण के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। 2 लाख करोड़ के इस भारी-भरकम बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बस्तर जैसे क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई घोषणाएं होने की संभावना है, जो राज्य की जीडीपी (GDP) ग्रोथ को नई ऊंचाई पर ले जा सकती हैं।
सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी, जिसके बाद विभागीय बजट मांगों पर चर्चा की जाएगी। विधानसभा सचिवालय ने सत्र की तैयारियां पूरी कर ली हैं। आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस बजट में टैक्स में कोई राहत देगी या नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। 23 फरवरी से शुरू होने वाला यह सत्र छत्तीसगढ़ की भविष्य की राजनीति और विकास की दिशा तय करने वाला साबित होगा।








